हर मोबाइल वर्चुअल जुआघर बन गया है - सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने ऑनलाइन सट्टेबाजी और जुए के खिलाफ चेतावनी दी है, कर्नाटक और तमिलनाडु में प्रतिबंध को मंजूरी दी। अदालत ने कहा है कि तकनीकी विकास ने समाज में जुए की गतिविधियों को बढ़ा दिया है।

नई दिल्ली। विशेष संवाददाता सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि तकनीकी विकास ने हर मोबाइल फोन काो ‘वर्चुअल जुआघर’ में तब्दील कर दिया है। शीर्ष अदालत ने ऑनलाइन सट्टेबाजी और बड़े पैमाने पर जुए के प्रचलन को सार्वजनिक व्यवस्था, सार्वजनिक शांति और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर खतरा बताते हुए यह टिप्पणी की है।
सुप्रीम कोर्ट की चेतावनी
जस्टिस जेबी पारदीवाला और आर महादेवन की पीठ ने हाल ही में पारित अपने फैसले में कहा है कि ‘लोगों में ऑनलाइन मनी गेमिंग की लत, आर्थिक नुकसान और इसके परिणामस्वरूप होने वाली आत्महत्याओं के मामले में निश्चित तौर पर प्रभाव डालता है। पीठ ने कहा है कि ऐसी गतिविधियों से जुड़े सामाजिक नुकसानों का सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़ी चिंताओं के साथ पर्याप्त संबंध है।
कर्नाटक और तमिलनाडु में प्रतिबंध का समर्थन
सुप्रीम कोर्ट ने आनलाइन गेमिंग और जुए पर प्रतिबंध लगाने के लिए कर्नाटक और तमिलनाडु सरकार द्वारा लाए गए कानून को सही ठहराते हुए यह फैसला दिया है।
जुआ खेलने वाले तक परिणाम सीमित नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने 69 पन्नों के फैसले में कहा है कि ऑनलाइन सट्टेबाजी और जुए के नतीजे सिर्फ इसमें शामिल लोगों यानी जुआ खेलने वालों तक तक ही सीमित नहीं रहता है, बल्कि इसका असर पूरे समाज पर व्यापक रूप से पड़ता है।
डिजिटल क्रांति ने जुए के तरीके को बदला
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि तकनीकी विकास के साथ आए डिजिटल क्रांति ने ‘जुआ’ के तरीके को पूरी तरह से बदल दिया।
हर वर्ग तक पहुंच गया है आनलाइन जुआ
सुप्रीम कोर्ट ने फैसले में कहा है कि ऑनलाइन मनी गेमिंग /जुआ अब केवल किसी खास वर्ग के उपयोगकर्ताओं तक सीमित नहीं है बल्कि अब यह हर वर्ग तक पहुंच गया है।
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