Hindi NewsNcr NewsDelhi NewsSupreme Court Uses Article 142 to Dismiss POCSO Proceedings in Rare Case of Love and Marriage
आरोपी के खिलाफ दर्ज पॉक्सो मामला रद्द

आरोपी के खिलाफ दर्ज पॉक्सो मामला रद्द

संक्षेप: सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद-142 के तहत एक दुर्लभ मामले में पॉक्सो की कार्यवाही को निरस्त कर दिया, जिसमें व्यक्ति ने नाबालिग लड़की से विवाह किया। अदालत ने कहा कि यह अपराध नहीं, बल्कि प्रेम का परिणाम था। पीड़िता और उनके पति अब खुशहाल जीवन जी रहे हैं, और कोर्ट ने पति को परिवार का सम्मान के साथ भरण-पोषण करने की शर्त रखी।

Sat, 1 Nov 2025 08:31 PMNewswrap हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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सुप्रीम कोर्ट ने एक दुर्लभ मामले में संविधान के अनुच्छेद-142 के तहत अपनी पूर्ण शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए उस व्यक्ति के खिलाफ पॉक्सो की कार्यवाही निरस्त कर दी, जिसने नाबालिग लड़की के साथ यौन संबंध बनाए और बाद में उससे शादी कर ली थी। अदालत ने यह भी कहा कि यह अपराध वासना का नहीं, बल्कि प्रेम का परिणाम था। न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति ए. जी. मसीह की पीठ ने कहा कि पीड़िता (अब पत्नी) ने कहा कि उसकी शादी उस व्यक्ति (दोषी) के साथ हुई थी और उन दोनों का एक साल का बेटा भी है। वे अब खुशहाल जीवन जी रहे हैं।

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लड़की के पिता भी चाहते हैं कि उनकी बेटी के पति के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही समाप्त हो। पीठ ने 28 अक्तूबर के अपने आदेश में कहा कि 'न्याय प्रदान करने के लिए एक सूक्ष्म दृष्टिकोण की जरूरत होती है। न्यायमूर्ति दत्ता ने पीठ की ओर से लिखे अपने फैसले में कहा कि संविधान निर्माताओं ने इस अदालत को उचित मामलों में ‘पूर्ण न्याय’ करने की असाधारण शक्ति प्रदान की है और यह संवैधानिक शक्ति अन्य सभी शक्तियों से अलग है तथा इसका उद्देश्य कानून के कठोर प्रयोग से उत्पन्न होने वाली अन्याय की स्थितियों से बचना है। पीठ ने कहा कि हम संविधान के अनुच्छेद-142 के तहत अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करके आपराधिक कार्यवाही निरस्त करते हैं। शीर्ष अदालत ने आगाह करते हुए उस व्यक्ति पर एक शर्त लगाई और कहा कि वह अपनी पत्नी और बच्चे को कभी नहीं छोड़ेगा तथा जीवन भर सम्मान के साथ उनका भरण-पोषण भी करेगा। पीठ ने कहा कि यदि भविष्य में अपीलकर्ता की ओर से कोई चूक होती है और उसकी पत्नी, उनके बच्चे या शिकायतकर्ता द्वारा इस अदालत के संज्ञान में लाया जाता है, तो परिणाम अपीलकर्ता के लिए सुखद नहीं होंगे। पीठ ने स्पष्ट किया कि यह आदेश विशिष्ट परिस्थितियों में दिया गया है और इसे किसी अन्य मामले के लिए मिसाल नहीं माना जाना चाहिए।