जम्मू कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल

Oct 07, 2024 06:43 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
share Share
Follow Us on

नई दिल्ली में, अनुच्छेद 370 खत्म होने के बाद पहली बार जम्मू कश्मीर में लोकतांत्रिक सरकार बहाल करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। याचिकाकर्ताओं ने केंद्र सरकार से राज्य का दर्जा बहाल...

जम्मू कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल

नई दिल्ली। विशेष संवाददाता विशेष राज्य का दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 खत्म किए जाने के बाद पहली जम्मू कश्मीर में जल्द ही लोकतांत्रिक सरकार बहाल हो जाएगी। इस बीच सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर केंद्र सरकार को जल्द से जल्द जम्मू कश्मीर को राज्य का दर्ज बहाल करने का आदेश देने की मांग की गई है।

केंद्र सरकार ने 5 अगस्त, 2019 को जम्मू कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को खत्म कर दिया था और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेश यानी जम्मू कश्मीर और लद्दाख में तब्दील कर दिया था। जम्मू कश्मीर के सरकारी स्कूल में वरिष्ठ लेक्चरर जहूर अहमद भट और सामाजिक कार्यकर्ता खुर्शीद अहमद मलिक ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अर्जी में समय-सीमा के भीतर जम्मू कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल करने का आदेश देने की मांग की है। शीर्ष अदालत में यह अर्जी केंद्र सरकार द्वारा अनुच्छेद 370 को खत्म करने को चुनौती देने वाले मामले में दाखिल किया है। राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग करने वाले जहूर अहमद भट ने जम्मू कश्मीर से 370 हटाए जाने के खिलाफ की याचिका दाखिल की थी। सुप्रीम कोर्ट के 7 जजों की संविधान पीठ ने 11 दिसंबर, 2023 को अनुच्छेद 370 को खत्म करने और जम्मू कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करने के केंद्र सरकार के फैसले को सही ठहराया था। साथ ही, 30 सितंबर तक जम्मू कश्मीर में विधानसभा चुनाव कराने का आदेश दिया था।

शीर्ष अदालत में दाखिल अर्जी में कहा है कि केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल ने अनुच्छेद 370 पर बहस के दौरान संविधान पीठ को भरोसा दिया था कि जल्द ही जम्मू कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल किया जाएगा। लेकिन 10 माह बीत जाने के बाद भी केंद्र सरकार ने इसके लिए कोई कदम नहीं उठाया है। अधिवक्ता सोयब कुरैशी के जरिए दाखिल अर्जी में याचिकाकर्ताओं ने कहा है कि ‘जम्मू-कश्मीर के जागरूक नागरिक होने के नाते वे इस बात से व्यथित हैं कि संविधान पीठ के फैसले के 10 माह बीत जाने के बाद भी, अभी तक जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल करने के लिए समुचित कदम नहीं उठाया गया। याचिका में कहा गया है कि 8 अक्टूबर को जम्मू कश्मीर विधानसभा चुनाव के परिणाम आने के बाद लोकतांत्रिक सरकार बनेगी, लेकिन यदि जल्द से जल्द राज्य का दर्जा बहाल नहीं किया गया तो यह जम्मू-कश्मीर के लोगों के अधिकारों को गंभीर रूप से प्रभावित होगा। याचिका में कहा गया है कि यदि जम्मू-कश्मीर के राज्य के दर्जे को बहाल करने के निर्देश इस अदालत द्वारा जल्द से जल्द पारित नहीं किए जाते हैं, तो इससे देश के संघीय ढांचे को गंभीर नुकसान पहुंचेगा।

याचिका में जम्मू-कश्मीर में हाल ही में संपन्न विधानसभा चुनाव का हवाला देते हुए कहा गया है कि राज्य के दर्जे की बहाली से पहले विधानसभा का गठन संघवाद के विचार का उल्लंघन होगा, जो भारत के संविधान के मूल ढांचे का हिस्सा है। याचिका में कहा गया है कि अभी विधानसभा चुनाव शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुए हैं, और इससे पहले लोकसभा चुनाव भी इसी साल शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुए। साथ ही कहा गया है कि यहां यह ध्यान रखना उचित होगा कि जम्मू-कश्मीर में भी आने वाले महीनों में पंचायत चुनाव होने हैं, जो सुचारू रूप से और शांतिपूर्ण परिस्थितियों में संपन्न होंगे। इसलिए यदि सर्वोच्च न्यायालय समय-सीमा के भीतर केंद्र शासित प्रदेश को राज्य का दर्जा बहाल करने का आदेश देता है, तो कोई सुरक्षा चिंता नहीं होगी। याचिका में कहा गया है कि राज्य का दर्जा बहाल करने में देरी से जम्मू-कश्मीर में लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित सरकार का कामकाज प्रभावित होगा। याचिका में यह भी कहा गया है यदि समय-सीमा के भीतर जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल नहीं किया जाता है, तो जम्मू-कश्मीर के लोगों के साथ गंभीर पक्षपात होगा, जिससे उनके मौलिक अधिकारों का हनन होगा।

Hindustan

लेखक के बारे में

Hindustan
हिन्दुस्तान भारत का प्रतिष्ठित समाचार पत्र है। इस पेज पर आप उन खबरों को पढ़ रहे हैं, जिनकी रिपोर्टिंग अखबार के रिपोर्टरों ने की है। और पढ़ें

लेटेस्ट   Hindi News ,    बॉलीवुड न्यूज,   बिजनेस न्यूज,   टेक ,   ऑटो,   करियर , और   राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।