तीन साल वकालत वाली शर्त का सम्मान किया जाए : शीर्ष कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक सेवा के लिए 3 साल वकालत की शर्त को बरकरार रखा है। कोर्ट ने कहा कि इस नियम को लागू करने का तरीका तय करना है। सभी उच्च न्यायालयों को आवेदन की अंतिम तारीख बढ़ाकर 30 अप्रैल, 2026 तक करने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्य न्यायाधीश ने न्यायपालिका में परिपक्व व्यक्तियों की आवश्यकता पर जोर दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि न्यायिक सेवा के लिए 3 साल वकालत की शर्त सुप्रीम कोर्ट के फैसले से तय की गई है, जिसका सम्मान किया जाना चाहिए। शीर्ष अदालत ने कहा कि अब एकमात्र मुद्दा इस नियम को लागू करने के तरीके तय करना है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह और के. विनोद चंद्रन की पीठ ने कहा कि न्यायिक सेवा के लिए वकालत की शर्त तो रहेगी ही। पीठ ने यह भी सुझाव दिया कि हमें उस पीठ का सम्मान करना चाहिए, जिसने 3 साल की शर्त तय की। सीजेआई ने कहा कि 3 साल की शर्त तो होनी चाहिए।
लेकिन क्या इसका मतलब यह है कि कोई वकील किसी न किसी कोर्ट में खाली बैठा रहे और बस देखता रहे? क्या इससे वे योग्य बन जाएंगे? या उन्हें मुफ्त कानूनी सहायता वकील बना दिया जाए। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने देश के सभी उच्च न्यायालयों और राज्यों के लोक सेवा आयोग को न्यायिक सेवा (जूनियर डिविजन) पदों के लिए आवेदन की अंतिम तारीख बढ़ाकर 30 अप्रैल, 2026 तक कर दें। शीर्ष अदालत ने इस न्यायिक सेवा के लिए 3 साल की वकालत को अनिवार्य किए जाने के नियम की समीक्षा की मांग वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह अंतरिम आदेश पारित किया है।पीठ ने कहा कि सभी उच्च न्यायालयों को निर्देश दिया जाता है कि यदि उन्होंने पहले ही इन पदों के लिए विज्ञापन जारी कर दिया है, तो वे आवेदन जमा करने की आखिरी तारीख 30 अप्रैल, 2026 तक बढ़ा दें। पीठ ने कहा कि राज्यों/ उच्च न्यायालयों या राज्य लोक सेवा आयोग द्वारा जारी किए जाने वाले नए विज्ञापनों में भी आवेदन जमा करने की आखिरी तारीख 30 अप्रैल, 2026 ही होनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट 20 मई 2025 के फैसले के खिलाफ दाखिल पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई कर रही है।हम चाहते हैं न्यायपालिका में परिपक्व लोग आएं : सीजेआईमुख्य न्यायाधीश ने कहा कि वकालत की शर्त का मकसद यह है कि आप कुछ सीखें। उन्होंने कहा कि महिलाओं और दिव्यांग व्यक्तियों के लिए विशेष छूट देना शायद व्यावहारिक न हो। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि हम चाहते हैं कि न्यायपालिका में परिपक्व लोग आएं।


