छात्रों की उपस्थिति मामले पर सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति दी। हाईकोर्ट ने कहा था कि लॉ कॉलेज या विश्वविद्यालय, न्यूनतम उपस्थिति की कमी के कारण विद्यार्थियों को परीक्षाओं में नहीं रोक सकते। यह याचिका 2016 में छात्र सुशांत रोहिल्ला की आत्महत्या से जुड़ी है।

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को दिल्ली हाईकोर्ट के एक फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति दी। हाईकोर्ट ने कहा था कि कोई भी लॉ कॉलेज या विश्वविद्यालय, न्यूनतम उपस्थिति की कमी के कारण विद्यार्थियों को परीक्षाओं में बैठने से नहीं रोक सकता। जस्टिस विक्रम नाथ, संदीप मेहता और विजय बिश्नोई की पीठ ने टिप्पणी की कि अगर ऐसी स्थिति को स्वीकार कर ली जाए, तो नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी और लॉ कॉलेजों के हॉस्टल ‘सिर्फ रहने-खाने की जगह’ बनकर रह जाएंगे। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के 3 नवंबर के फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया और कहा कि वह इस मामले की सुनवाई करेगा और इस पर फैसला देगा।
पीठ ने हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) और अन्य से जवाब मांगा। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में बीसीआई से अनिवार्य उपस्थिति नियमों का फिर से मूल्यांकन करने को भी कहा था। यह याचिका 2016 में विधि के छात्र सुशांत रोहिल्ला की आत्महत्या से जुड़ी थी। आरोप था कि जरूरी अटेंडेंस की कमी के कारण उसे सेमेस्टर परीक्षाओं में बैठने से रोक दिया गया था। रोहिल्ला लॉ का तीसरे साल का छात्र था, ने 10 अगस्त 2016 को यहां अपने घर पर फांसी लगा ली थी।
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