बैंक खाते फ्रीज और डी-फ्रीज मामले में सुप्रीम कोर्ट करेगा सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने साइबर अपराध की जांच के दौरान बैंक खातों को फ्रीज और डी-फ्रीज करने के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार करने की याचिका पर सुनवाई करने की सहमति दी है। कोर्ट ने केंद्र सरकार को याचिका की प्रति तीन दिनों में देने का निर्देश दिया है।

नई दिल्ली, एजेंसी। सुप्रीम कोर्ट साइबर अपराध की जांच के दौरान बैंक खातों को फ्रीज और डी-फ्रीज करने के मामले में एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार करने से जुड़ी याचिका पर सुनवाई को सहमत हो गया है। कोर्ट ने मामले को अगले सप्ताह के लिए सूचीबद्ध किया है। न्यायमूर्ति पंकज मित्तल और न्यायमूर्ति एसवीएन भट्टी की पीठ ने याचिका की प्रति तीन दिनों के भीतर केंद्र सरकार को देने का निर्देश दिया। याचिका में यह भी मांग की है कि देशभर की सभी जांच एजेंसियों, जिनमें साइबर सेल भी शामिल हैं उनके लिए उचित दिशानिर्देश जारी किए जाएं, ताकि किसी भी बैंक खाते को बिना लिखित, कारणयुक्त आदेश के और कार्रवाई के 24 घंटे के भीतर खाताधारक को सूचना दिए बिना फ्रीज न किया जाए।
याचिकाकर्ता विवेक वार्ष्णेय ने अपने अधिवक्ता तुषार मनोहर खैरनार के जरिए दायर याचिका में कहा कि तमिलनाडु पुलिस के साइबर सेल ने कथित तौर पर बिना किसी पूर्व सूचना, संवाद या न्यायिक अनुमति के उनके बैंक खाते/खातों को मनमाने ढंग से फ्रीज़ कर दिया, जिससे भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1)(जी) और 21 के तहत उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हुआ है। याचिका में कहा गया है, “प्रतिवादी भारत संघ और भारतीय रिज़र्व बैंक को निर्देश दिया जाए कि वे साइबर अपराध जांच के दौरान बैंक खातों को फ्रीज़ और डी-फ्रीज़ करने के लिए एक समान SOP तैयार करें, ताकि मनमानी कार्रवाई को रोका जा सके और देशभर में प्रक्रियात्मक निष्पक्षता सुनिश्चित की जा सके।

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