एससी/एसटी आरक्षण मामले में केंद्र, राज्यों को नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए आरक्षण से क्रीमी लेयर को बाहर किए जाने की मांग पर विचार करने की सहमति दी है। केंद्र और राज्य सरकारों को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने के लिए कहा गया है। यह मामला रामशंकर प्रजापति की याचिका से जुड़ा है।

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए आरक्षण से क्रीमी लेयर को बाहर किए जाने की मांग पर विचार करने पर सहमति जताई। शीर्ष अदालत ने इस मामले में केंद्र और सभी राज्य सरकारों को नोटिस जारी कर अपना अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है। शीर्ष अदालत ने एससी/एसटी आरक्षण से क्रीमी लेयर बाहर करने की मांग को लेकर दाखिल जनहित याचिका को पहले से लंबित एक अन्य जनहित याचिका के साथ सुनवाई करने का फैसला किया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ से इस मामले को रामशंकर प्रजापति और अन्य बनाम भारत सरकार और अन्य शीर्षक वाली एक और लंबित याचिका के साथ टैग किया है।
रामशंकर मामले में दाखिल जनहित याचिका में सरकारी नौकरी और शिक्षा प्रक्रियाओं में आरक्षण के हकदार कैटेगरी के भीतर आर्थिक रूप से कमजोर उम्मीदवारों के लिए प्राथमिकता आरक्षण की मांग की गई है। याद रहे है कि संविधान पीठ ने उप-वर्गीकरण मामले में कहा था कि एससी/एसटी कोटे से क्रीमी लेयर को बाहर किया जाना चाहिए। संविधान पीठ ने 6-1 के बहुमत के फैसले से एससी श्रेणी के भीतर अधिक पिछड़े लोगों के लिए अलग कोटा देने के लिए अनुसूचित जातियों का उप-वर्गीकरण को सही माना था।

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