
सुपरनोवा परियोजना के लिए भी बने समाधान तंत्र
सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा स्थित सुपरटेक रियल्टर्स की सुपरनोवा परियोजना के लिए आम्रपाली और यूनिटेक की तर्ज पर हाइब्रिड समाधान तंत्र अपनाने का सुझाव दिया। न्याय मित्र ने रिपोर्ट में नए निदेशक मंडल की...
सुप्रीम कोर्ट को नोएडा स्थित सुपरटेक रियल्टर्स की सुपरनोवा परियोजना पूरा करने के लिए आम्रपाली और यूनिटेक की तर्ज पर एक हाइब्रिड समाधान तंत्र अपनाने का सुझाव दिया गया। शीर्ष अदालत के पूर्व जज जस्टिस नवीन सिन्हा की अध्यक्षता में यह तंत्र बनाने का सुझाव न्याय मित्र की ओर से दिया गया। जस्टिस सूर्यकांत और जॉयमाल्या बागची की पीठ के समक्ष परियोजना की दिवालियापन कार्यवाही से संबंधित मामले में सहायता कर रहे अधिवक्ता राजीव जैन ने बताया कि घर खरीदारों सहित सभी हितधारकों ने अदालत की निगरानी में समाधान प्रक्रिया में विश्वास जताया। अदालत को न्याय मित्र की 721 पृष्ठों की रिपोर्ट में सुपरटेक रियल्टर्स के एक नए निदेशक मंडल और एनबीसीसी की तरह एक परियोजना प्रबंधन सलाहकार की नियुक्ति का सुझाव दिया गया।

न्याय मित्र राजीव जैन ने अपनी रिपोर्ट में सुझाव दिया कि एनसीएलटी द्वारा नियुक्त अंतरिम समाधान पेशेवर को बदला जाना चाहिए क्योंकि कई महीने पहले उनकी नियुक्ति के बावजूद, वह कंपनी का नियंत्रण अपने हाथ में नहीं ले पाएं। दिल्ली-एनसीआर की सबसे ऊंची इमारत दिवालियापन की कार्यवाही का सामना कर रही सुपरटेक रियल्टर्स, संकटग्रस्त रियल्टी दिग्गज सुपरटेक लिमिटेड की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी है। इस कंपनी का नोएडा के सेक्टर-94 में आवासीय, वाणिज्यिक, कार्यालय स्थान, स्टूडियो अपार्टमेंट, सर्विस अपार्टमेंट और शॉपिंग सेंटर सहित एक मिश्रित उपयोग वाली रियल एस्टेट परियोजना ‘सुपरनोवा निर्माणाधीन परियोजना है। यह 300 मीटर ऊंची दिल्ली-एनसीआर की सबसे ऊंची इमारत है। समाधान तंत्र के लिए इन नामों का सुझाव रिपोर्ट में समाधान तंत्र की गहन निगरानी और उन्हें बार-बार अदालत आने से बचाने के लिए सशक्त बनाने हेतु शीर्ष अदालत के किसी पूर्व जज या हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति का सुझाव दिया गया। कोर्ट में इस प्रक्रिया की निगरानी के लिए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज नवीन सिन्हा और जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश एम.एम. कुमार, एनसीएलटी के पूर्व अध्यक्ष और एनएचआरसी के पूर्व सदस्य का नाम सुझाया। प्रवर्तक को नियंत्रण से हटाने का सुझाव सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि यदि जरूरी हो तो प्रवर्तक/अपीलकर्ता को नियंत्रण से हटा दिया जाना चाहिए तो उनकी भूमिका केवल तकनीकी सहयोग तक सीमित हो सकती है। इसके अलावा, प्रमुख प्रबंधन कर्मियों को भी किसी भी समाधान तंत्र का हिस्सा नहीं होना चाहिए। खातों का फोरेंसिक ऑडिट कराया जाए कोर्ट में पेश रिपोर्ट में सुपरटेक रियल्टर्स और उसकी मूल कंपनी सुपरटेक लिमिटेड के खातों का एक प्रतिष्ठित संस्था द्वारा फोरेंसिक ऑडिट कराने का भी सुझाव दिया। न्याय मित्र ने कहा कि परियोजना को पूरा करने के लिए अपनाई जाने वाली समाधान प्रक्रिया के मॉडल को लेकर घर खरीदारों की राय विभाजित थी।

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