छात्र को स्कूल से निकालने पर मध्य प्रदेश जवाब दे : शीर्ष कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने इंदौर के एक स्कूल से निष्कासित एक नाबालिग लड़के के पिता की याचिका पर मध्य प्रदेश सरकार से जवाब मांगा है। आरोप है कि लड़के ने शिक्षकों के बारे में आपत्तिजनक मीम साझा किया था। कोर्ट ने कहा कि बच्चों का व्यवहार उनके माहौल से प्रभावित होता है और सांप्रदायिक भावना वाले मीम्स को बढ़ावा नहीं दिया जाना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को इंदौर के एक स्कूल से निष्कासित किए गए एक नाबालिग लड़के के पिता द्वारा दायर याचिका पर मध्य प्रदेश सरकार और अन्य से जवाब मांगा है। आरोप है कि लड़के ने शिक्षकों के बारे में एक आपत्तिजनक मीम प्रसारित किया था। जस्टिस बी. वी. नागरत्ना और उज्जल भुइयां की पीठ ने कहा कि नाबालिग बच्चे आमतौर पर ऐसा व्यवहार अपने आसपास के माहौल से सीखते हैं और सांप्रदायिक भावना वाले मीम्स को बढ़ावा नहीं दिया जाना चाहिए। याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वकील निपुण सक्सेना ने कहा कि दी गई सजा कथित दुर्व्यवहार के मुकाबले बहुत ज्यादा थी, जो नाबालिग लड़के के खिलाफ साबित भी नहीं हुआ था।
सक्सेना ने कहा कि मीम अकाउंट प्राइवेट था और इसे कम से कम तीन बच्चे चला रहे थे, जिनमें से सभी को स्कूल से निकाल दिया गया था। बेंच ने मामले की सुनवाई के लिए 13 फरवरी की तारीख तय की। सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के पिछले वर्ष नवंबर के एक आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर नोटिस जारी किया। हाईकोर्ट ने 2024-2025 के कक्षा 9 के शैक्षणिक सत्र के बीच में 13 वर्षीय छात्र को स्कूल से निष्कासित करने के स्कूल के फैसले को बरकरार रखा गया था।
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