Hindi NewsNcr NewsDelhi NewsSupreme Court Seeks Response from Government on NEET-PG 2025-26 Cut-Off Controversy
नीट पीजी का कटऑप्ऊ फ कम करने पर केंद्र, एनएमसी व अन्य से जवाब तलब

नीट पीजी का कटऑप्ऊ फ कम करने पर केंद्र, एनएमसी व अन्य से जवाब तलब

संक्षेप:

सुप्रीम कोर्ट ने नीट-पीजी 2025-26 के लिए क्वालिफाइंग कट-ऑफ पर्सेंटाइल को कम करने के खिलाफ याचिकाओं पर केंद्र सरकार और एनएमसी को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने एनबीईएमएस को भी जवाब देने का निर्देश दिया है। याचिका में कहा गया है कि कट-ऑफ में कमी से मरीजों की सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर खतरा हो सकता है।

Feb 04, 2026 05:44 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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नई दिल्ली, विशेष संवाददाता। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को नीट-पीजी 2025-26 के लिए क्वालिफाइंग कट-ऑफ पर्सेंटाइल को कम करने के खिलाफ दाखिल याचिकाओं पर केंद्र सरकार और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। शीर्ष कोर्ट ने पोस्ट ग्रेजुएट चिकित्सा पाठ्यक्रम में करीब 18 हजार खाली सीटों को भरने के लिए नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशंस इन मेडिकल साइंसेज (एनबीईएमएस) के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर यह निर्देश दिया है। जस्टिस पीएस नरसिम्हा और आलोक अराधे की पीठ ने इस मामले में बेंच ने एनबीईएमएस को भी नोटिस जारी कर अपना जवाब देने को कहा है।

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पीठ ने सभी पक्षकारों को मामले की अगली सुनवाई 6 फरवरी से पहले अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। एनबीईएमएस ने देश भर में 18,000 से अधिक पोस्टग्रेजुएट मेडिकल की खाली सीटें को भरने के लिए नीट-पीज 2025 की के लिए क्वालिफाइंग पर्सेंटाइल को कम कर दिया। संशोधित कटआफ के तहत आरक्षित श्रेणियों के लिए 40 पर्सेंटाइल से घटाकर शून्य कर दिया है। जबकि सामान्य श्रेणी के लिए 50 पर्सेंटाइल से घटाकर 7 कर दिया गया है। डॉ. सौरभ कुमार और डॉ. लक्ष्य मित्तल एवं अन्य की ओर से दाखिल याचिका में दावा किया गया है कि दाखिला के मानकों को कम करने से मरीजों की सुरक्षा, सार्वजनिक स्वास्थ्य और मेडिकल पेशे की अखंडता को खतरा हो सकता है। याचिका में कहा गया है कि चिकित्सा कोई सामान्य पेशा नहीं है, यह सीधे तौर पर मानव जीवन, शारीरिक अखंडता और गरिमा से जुड़ा है। राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड ने पीजी मेडिकल की खाली सीटों को भरने के लिए क्वालिफाइंग कट आफ में कमी की है। याचिका में कहा गया है कि कट आफ को कम करना योग्यता को एक मानदंड के खत्म करने के समान है और इससे एक प्रतियोगी परीक्षा को केवल एक प्रशासनिक औपचारिकता में बदल देती है। याचिका में कहा गया है कि पीजी मेडिकल स्तर पर योग्यता में कमी राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग अधिनियम 2019 के वैधानिक जनादेश के खिलाफ है। सुप्रीम कोर्ट में संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दाखिल याचिका में राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड द्वारा कटआफ कम करने के फैसले को रद्द करने की मांग की है।