‘औद्योगिक भूमि मुआवजा रिहायशी जमीन के जैसा नहीं’
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्ग के लिए अधिग्रहित औद्योगिक जमीन का मुआवजा तय करने के लिए पास के गांव की आवासीय भूमि की बिक्री दस्तावेज का उपयोग नहीं किया जा सकता। जस्टिस संजय कुमार और के. विनोद चंद्रन ने इस मामले में कहा कि मुआवजा तय करने के लिए एक ही तरह की जमीन होना जरूरी है।

सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि राष्ट्रीय राजमार्ग विस्तार के लिए अधिग्रहित औद्योगिक जमीन का मुआवजा तय करने के लिए, पास के गांव की आवासीय भूमि की बिक्री दस्तावेज (सेल डीड) का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। शीर्ष अदालत ने कहा कि भूमि अधिग्रहण कानून के तहत मुआवजा तय करने के लिए एक ही तरह की जमीन होने की शर्त जरूरी है। जस्टिस संजय कुमार और के. विनोद चंद्रन की पीठ ने भूमि अधिग्रहण के प्रावधानों को स्पष्ट करते हुए यह फैसला दिया। पीठ ने कहा कि मुआवजा तय करने के लिए एक ही प्रकार की जमीन होना जरूरी है। पीठ ने कहा कि सक्षम प्राधिकारों को भूमि अधिग्रहण का मुआवजा तय करते समय कानून के इस प्रावधान को प्रभावी तरीके से लागू करना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की ओर से दाखिल अपील पर यह फैसला दिया है。
मामले की जानकारी
पीठ ने कहा कि मौजूदा मामले में भूमि अधिग्रहण कानून की धारा 26(1) के कड़े प्रावधानों को लागू करने पर, हम पाते हैं कि मध्यस्थ ने साफ तौर पर गलती की है। उन्होंने प्रतिवादी संख्या एक की जमीन का बाजार मूल्य तय करने के लिए, पास के गांव की रिहायशी जमीन से जुड़े बिक्री दस्तावेज पर भरोसा किया, जबकि प्रतिवादी के जिस जमीन को अधिग्रहित किया गया था, उसका इस्तेमाल औद्योगिक कामों के लिए किया जा रहा था। पीठ ने कहा कि दोनों जमीनें एक तरह की नहीं थी, इसलिए मुआवजा तय करने के लिए उस बिक्री दस्तावेज में बताई गई कीमत को आधार नहीं बनाया जा सकता था।
यह था मामला
यह मामला नागपुर में राष्ट्रीय राजमार्ग को चार-लेन का बनाने के लिए 1,394 वर्ग मीटर जमीन के अधिग्रहण से जुड़ा है। पीठ ने इस मामले में हाईकोर्ट का फैसला रद्द करते हुए कहा कि इस मामले में प्रतिवादी संख्या एक अपनी अधिग्रहित 1394 वर्ग मीटर भूखंड के ₹2,020 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से मुआवजा पाने का हकदार होगा, न कि ₹3,588 प्रति वर्ग मीटर की दर से, जैसा कि मध्यस्थ ने तय किया था और हाईकोर्ट ने इसकी पुष्टि की थी। पीठ ने कहा कि जमीन मालिक कानून के तहत अन्य लाभों को पाने का हकदार होगा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
लेखक के बारे में
Hindustanलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।


