‘फ्लैट किराये पर देने से मालिक ‘उपभोक्ता’ श्रेणी से बाहर नहीं होगा’

Feb 05, 2026 10:07 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि रिहायशी फ्लैट को किराए पर देने से खरीदार उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत उपभोक्ता नहीं बनता। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि बिल्डर को यह साबित करना होगा कि फ्लैट का खरीदना मुख्य रूप से व्यावसायिक उद्देश्य था। यह निर्णय विनीत बहरी की अपील पर पारित किया गया है।

‘फ्लैट किराये पर देने से मालिक ‘उपभोक्ता’ श्रेणी से बाहर नहीं होगा’

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी रिहायशी फ्लैट को किराए या पट्टे पर देने भर से उसका खरीदार उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत ‘उपभोक्ता’ की श्रेणी से बाहर नहीं हो जाता है। न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति एन. वी. अंजारिया की पीठ ने स्पष्ट किया कि किसी खरीदार को 'वाणिज्यिक उद्देश्य' के आधार पर उपभोक्ता की परिभाषा से बाहर करने के लिए बिल्डर को यह साबित करना होगा कि फ्लैट खरीदने का प्रमुख उद्देश्य व्यावसायिक था। शीर्ष अदालत ने कहा कि फ्लैट को पट्टे पर देने भर से यह नहीं पता चलता है कि अपीलकर्ता ने संपत्ति को प्रमुख रूप से वाणिज्यिक गतिविधि में संलग्न होने के उद्देश्य से खरीदा था।

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पीठ ने यह भी कहा कि ‘व्यावसायिक उद्देश्य’ हरेक मामले की परिस्थितियों के आधार पर तथ्यात्मक रूप से तय किया जाना चाहिए। यह आदेश विनीत बहरी की अपील पर पारित किया गया, जिन्होंने राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) के एक आदेश को चुनौती दी थी। आदेश में फ्लैट किराये पर दिए जाने को व्यावसायिक उद्देश्य मानते हुए उनकी शिकायत खारिज कर दी गई थी।

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