जमानत के लिए पैसे जमा करने की शर्त न हो : शीर्ष कोर्ट

Feb 10, 2026 04:45 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आरोपी को जमानत देने के लिए पैसे जमा कराने की शर्त नहीं होनी चाहिए। झारखंड हाईकोर्ट के एक आदेश को रद्द करते हुए, कोर्ट ने कहा कि यदि जमानत के लिए तथ्य उचित हैं, तो पैसे जमा करने की शर्त नहीं लगानी चाहिए। मामला धोखाधड़ी से संबंधित था।

जमानत के लिए पैसे जमा करने की शर्त न हो : शीर्ष कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आरोपी को जमानत या अग्रिम जमानत देने के लिए पैसे जमा कराने की शर्त नहीं होनी चाहिए। शीर्ष अदालत ने कहा कि यदि तथ्यों पर विचार करने के जमानत/अग्रिम जमानत बनती है तो अदालत को आगे बढ़ना चाहिए, न कि जमानत देने के लिए पैसे जमा कराने की शर्त लगानी चाहिए। जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने धोखाधड़ी के मामले में झारखंड हाईकोर्ट के एक आदेश को रद्द करते हुए यह टिप्पणी की। हाईकोर्ट ने धोखाधड़ी के मामले में आरोपी पिता-पुत्र को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया था। पीठ ने आदेश दिया है कि मामले में गिरफ्तार किए जाने की स्थिति में आरोपियों को जमानत पर रिहा किया जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि यह बड़े ही दुर्भाग्य की बात है कि इस अदालत के स्पष्ट निर्देशों ‘नियमित या अग्रिम जमानत देने के लिए कोई रकम जमा नहीं करनी होगी’ के बावजूद हाईकोर्ट ने आरोपियों से जमानत के लिए बाकी 9,12,926.84 रुपये जमा करने को कहा। शीर्ष अदालत ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए इस मामले में पारित अपने फैसले की प्रति झारखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को भेजने का आदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने प्रांतिक कुमार एवं अन्य की ओर से हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील का निपटारा करते हुए यह आदेश दिया है। पीठ ने इसके साथ ही कहा कि यदि मामले में आरोपियों को गिरफ्तार किया जाता है, उनको जमानत पर रिहा किया जाएगा। जहां तक जमानत की शर्त का सवाल है तो यह मामले के जांच अधिकारी की संतुष्टि पर छोड़ दिया है। यह था मामला पेश मामले के अनुसार पुलिस ने एक व्यक्ति की शिकायत पर पिता-पुत्र के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया था। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया गया था कि आरोपियों ने उससे क्राफ्ट पेपर खरीदने के बाद 9 लाख रुपये का भुगतान नहीं किया। पहले निचली अदालत ने आरोपियों को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया। इसके खिलाफ आरोपियों ने हाईकोर्ट में अपील दाखिल की थी। हाईकोर्ट ने आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी।

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