‘दूरसंचार स्पेक्ट्रम को कर्ज चुकाने के लिए नहीं बेच सकती कंपनियां’

Feb 13, 2026 09:33 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दूरसंचार स्पेक्ट्रम का मालिक केंद्र सरकार है, इसलिए दिवालिया कंपनियों का कर्ज चुकाने के लिए इसे नहीं बेचा जा सकता। कोर्ट ने आईबीसी 2016 के तहत स्पेक्ट्रम को संपत्ति मानने से मना किया और इसे सार्वजनिक संसाधन के रूप में देखा। इस फैसले से टेलिकॉम सेक्टर में महत्वपूर्ण बदलाव आएंगे।

‘दूरसंचार स्पेक्ट्रम को कर्ज चुकाने के लिए नहीं बेच सकती कंपनियां’

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि दूरसंचार स्पेक्ट्रम का मालिक और ट्रस्टी केंद्र सरकार है, ऐसे में दिवालिया दूरसंचार कंपनियों का कर्ज चुकाने के लिए इसे (स्पेक्ट्रम) बेचा नहीं जा सकता। शीर्ष अदालत ने कहा कि दूरसंचार सेवा प्रदाता को आवंटित स्पेक्ट्रम ऐसा एसेट नहीं है दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) 2016 के तहत कार्रवाई की जाए। जस्टिस पी. एस. नरसिम्हा और ए. एस. चंदुरकर की पीठ ने फैसला सुनाते हुए कहा कि स्पेक्ट्रम भारत के लोगों का है, जिसमें सरकार मालिक/ट्रस्टी के तौर पर काम करती है और आईबीसी इसके आवंटन, नियंत्रण एवं जन संसाधन (पब्लिक रिसोर्स) के तौर पर इस्तेमाल को नियंत्रित करने वाले कानूनी ढांचे के विपरीत काम नहीं कर सकता।

पीठ ने कहा कि एक तरफ केंद्र सरकार जहां स्पेक्ट्रम का मालिक और ट्रस्टी है, वहीं दूसरी तरफ भारतीय दूर संचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) नियामक है और दोनों मिलकर दूरसंचार के पूरे क्षेत्र पर कब्जा करते हैं। शीर्ष अदालत का यह फैसला दो दूरसंचार कंपनियों के दिवाला एवं समाधान प्रक्रिया जुड़े मामलों में राष्ट्रीय कंपनी लॉ अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) के फैसले के खिलाफ अपीलों पर है। कंपनियों को कर्ज देने वाले संस्थान ने अपना बकाया कर्ज वसूलने के लिए स्पेक्ट्रम को मोनेटाइज करने की मांग की थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दूरसंचार लाइसेंस और स्पेक्ट्रम का आवंटन, वास्तव में एक इनटैंजिबल (अमूर्त)एसेट हो सकता है, लेकिन यह हमेशा देश के टेलीकम्युनिकेशन कानूनों जैसे टेलीग्राफ एक्ट, 1885, वायरलेस टेलीग्राफी एक्ट, 1993 और ट्राई एक्ट, 1997 के तहत आता है, जिसके बाद नियम और कानून लागू होते हैं। इस अपील पर शीर्ष अदालत ने दिया फैसला सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला भारतीय स्टेट बैंक और दो दूरसंचार कंपनियों की अपील पर दिया है जिसमें एनसीएलएटी के 2021 के आदेश को चुनौती दी गई थी। एनसीएलएटी ने कहा था कि सभी बकाया, सरकारी बकाया चुकाने के बाद ही स्पेक्ट्रम को रेजोल्यूशन प्लान के तहत ट्रांसफर या बेचा जा सकता है। टेलिकॉम सेक्टर पर ‌आईबीसी लागू करने से गड़बड़ी हुई सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दूरसंचार क्षेत्र दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) 2016 को लागू करने से जो गड़बड़ी हुई है, जो एक अलग कानूनी व्यवस्था के तहत काम करता है, लेकिन संसद का ऐसा कोई इरादा नहीं था। फैसले में यह भी कहा गया कि एयरसेल ग्रुप जैसी कॉर्पोरेट देनदारों ने देश के जरूरी संसाधन, स्पेक्ट्रम को अपने खाते में ‘संपत्ति’ बताकर, लाइसेंस एग्रीमेंट, ट्राईपार्टी एग्रीमेंट (दूर संचार विभाग, बैंकों और दूरसंसाचर सेवा प्रदाता के बीच), या 2015 की स्पेक्ट्रम ट्रेडिंग गाइडलाइंस के लिए आईबीसी लागू करने के लिए जो कानूनी व्याख्या अपनाई है, वह ‘कुत्ते को दुम हिलाने’ जैसा है।

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