राज्यों की जांच एजेंसी को भी केंद्रीय कर्मियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच करने है अधिकार

Jan 20, 2026 05:30 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार की जांच एजेंसियां केंद्रीय कर्मचारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच कर सकती हैं। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इन्हें सीबीआई से अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है। यह फैसला राजस्थान उच्च न्यायालय के एक फैसले को चुनौती देने वाली अपील पर दिया गया है।

राज्यों की जांच एजेंसी को भी केंद्रीय कर्मियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच करने है अधिकार

नई दिल्ली। विशेष संवाददाता सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि राज्य सरकार की जांच एजेंसी भी केंद्रीय कर्मचारियों/अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच करने और संबंधित अदालत में आरोप पत्र दाखिल कर सकती है। शीर्ष अदालत ने यह भी साफ कर दिया कि भ्रष्टाचार के आरोप में केंद्रीय कर्मचारियों/अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने से पहले राज्यों की जांच एजेंसी को सीबीआई से किसी भी तरह की अनुमति लेने की जरूरत नहीं है। जस्टिस जेबी पारदीवाला और सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने फैसले में कहा है कि राज्य सरकार जांच एजेंसियों द्वारा दाखिल आरोपपत्र को सीबीआई की मंजूरी नहीं होने के कारण अमान्य नहीं ठहराया जा सकता।

पीठ ने राजस्थान उच्च न्यायालय के उस फैसले को चुनौती देने वाली अपील को खारिज करते हुए यह फैसला दिया है, जिसमें राज्यकेंद्रीय कर्मचारी के खिलाफ राज्य के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) द्वारा दर्ज मामले को रद्द करने से इनकार कर दिया था। केंद्र सरकार में कर्मचारी नवल किशोर मीणा को राहत देने से इनकार करते हुए शीर्ष अदालत ने सोमवार को पारित फैसले में कहा है कि राज्य सरकार की जांच एजेंसी/पुलिस अधिकारियों के पास केंद्रीय कर्मचारियों द्वारा किए गए भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दंडनीय अपराधों से संबंधित मामलों में जांच करने और चार्जशीट दाखिल करने का अधिकार है। पीठ ने कहा है कि राज्य के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के पास भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के प्रावधानों के तहत आपराधिक मामला दर्ज करने का अधिकार क्षेत्र है, भले ही आरोपी केंद्र सरकार में कर्मचारी क्यों न हो। शीर्ष अदालत ने अपने फैसले में केंद्रीय कर्मचारी की इस दलील को सिरे से खारिज कर दिया कि दिल्ली स्पेशल पुलिस एस्टैब्लिशमेंट एक्ट के तहत स्थापित केवल सीबीआई को ही केंद्र सरकार के कर्मचारी से जुड़े मामलों में केस दर्ज करने, जांच करने और आरोपपत्र दाखिल करने का अधिकार है। सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि ‘कई फैसलों में यह माना गया है कि किसी राज्य में तैनात केंद्र सरकार के कर्मचारियों द्वारा किए गए रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार के अपराधों की जांच या तो नियमित राज्य पुलिस या स्पेशल पुलिस एस्टैब्लिशमेंट द्वारा की जा सकती है और राज्य एजेंसी द्वारा बिछाए गए जाल और की गई जांच को अधिकार क्षेत्र की कमी के आधार पर अवैध नहीं ठहराया जा सकता। इस मामले में आरोपी केंद्रीय कर्मचारी ने उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि दिल्ली स्पेशल पुलिस एस्टैब्लिशमेंट एक्ट (संशोधित) के तहत निर्धारित विशेष शक्तियों और प्रक्रियाओं को देखते हुए, केंद्र सरकार के कर्मचारियों द्वारा किए गए रिश्वत और भ्रष्टाचार से संबंधित अपराधों की जांच केवल स्पेशल पुलिस एस्टैब्लिशमेंट द्वारा ही की जा सकती है। आरोपी ने कहा था कहा था कि चूंकि वह केंद्रीय लोक निर्माण विभाग का कर्मचारी था और जांच स्पेशल एस्टैब्लिशमेंट द्वारा नहीं की गई थी, इसलिए उनपर पूरा मुकदमा ही अमान्य हो गया। हालांकि शीर्ष अदालत ने अपील खारिज करते हुए कहा कि दिल्ली स्पेशल पुलिस एस्टैब्लिशमेंट एक्ट की योजना न तो स्पष्ट रूप से और न ही आवश्यक रूप से नियमित पुलिस अधिकारियों को किसी अन्य सक्षम कानून के तहत अपराधों की जांच करने के उनके अधिकार क्षेत्र, शक्ति और क्षमता से वंचित करती है।

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