
नियमित कर्मचारी के बराबर समानता का दावा नहीं कर सकता है अनुबंधित कर्मचारी - सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अनुबंध पर काम करने वाले कर्मचारी नियमित कर्मचारियों के समानता का दावा नहीं कर सकते। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि नियमित नियुक्तियां पारदर्शी प्रक्रिया से होती हैं, जबकि ठेके पर काम करने वाले कर्मचारियों की नियुक्ति में भेद होता है। यह निर्णय आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के 2018 के फैसले को रद्द करते हुए दिया गया है।
नई दिल्ली। विशेष संवाददाता सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि किसी एजेंसी के जरिए अनुबंध पर नौकरी पाने वाले कर्मचारी सरकारी महकमों/ निकायों के नियमित कर्मचारियों के बराबर समानता का दावा नहीं कर सकते। सरकारी महकमों/निकायों के नियमित नौकरी को सार्वजनिक संपत्ति बताते हुए शीर्ष अदालत ने अपने फैसले में कहा है कि ‘यदि नियमित कर्मचारी और ठेके पर काम कर रहे कर्मचारियों के बीच अंतर स्पष्ट नहीं होगा तो, नौकरी पर रखने के अलग-अलग तरीकों का मकसद ही खत्म हो जाएगा।’ जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और विपुल एम. पंचोली की पीठ ने अपने फैसले में कहा है कि ‘नियमित नियुक्तियां पारदर्शी प्रक्रिया से होती हैं, जिससे सभी योग्य उम्मीदवारों को बराबर मौका मिलता है, जबकि किसी एजेंसी/ ठेकेदार के जरिए नौकरी देना उसकी मर्जी पर छोड़ दिया जाता है, जिससे कानून में दोनों श्रेणी पूरी तरह से अलग हो जाती हैं।’
शीर्ष अदालत ने आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा 2018 में पारित उस फैसले को रद्द कर दिया है, जिसमें किसी तीसरे पक्ष द्वारा यानी ठेकेदार द्वारा नगर निगम के लिए 1994 में अनुबंध पर रखे गए कर्मचारियों को नियमित कर्मचारी के समान वेतन एवं भत्ता से संबंधित लाभ देने का आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि ‘एक नियमित कर्मचारी और ऐसे अनुबंध वाले कर्मचारियों के बीच ऐसे सभी फर्क नहीं किए जाते हैं, तो अलग-अलग तरीकों से और अलग-अलग कैपेसिटी में नियुक्ति देने का मूलभूत आधार अपना मकसद और पवित्रता खो देगा और आखिर में सभी को बिल्कुल एक जैसा फायदा मिलेगा। पीठ ने कहा है कि कानून में इसकी इजाजत नहीं दी जा सकती क्योंकि किसी स्टेट एंटिटी के तहत नौकरी एक सार्वजनिक संपत्ति है और देश के हर नागरिक को इसके लिए अप्लाई करने का हक है। पीठ ने कहा है कि नियमित नौकरी में, जो सीधे राज्य प्राधिकारी द्वारा की जाती है, यह पक्का करने के लिए सेफगार्ड होते हैं कि नौकरी/काम पर रखने का प्रणाली पारदर्शी हो और मिनिमम अहर्ता को पूरा करे। साथ ही सभी योग्य उम्मीदवारों को समान अवसर मिले और आखिर में सही व्यक्ति को चुनने के लिए एक तरीका अपनाया जाए। शीर्ष अदालत ने नियमित नियुक्ति में सुरक्षा उपाय इसलिए हैं ताकि कोई पक्षपात या अन्य बाहरी विचार न हो, जहां लोगों को, केवल योग्यता के आधार पर, कानून में ज्ञात पूरी तरह पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से भर्ती किया जाता है। सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र प्रदेश के कुरनूल जिले में नंदयाल नगरपालिका परिषद की अपील पर यह फैसला दिया है। अपील में उच्च न्यायालय के 2018 के फैसले को चुनौती दी गई थी। यह मामला ठेकेदार जरिए नौकरी पर रखे गए सफाई कमाचारियों से जुड़ा था और इस समय समय पर ठेकेदार भी बदलता रहा।

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