‘लोगों से उस सेवा के पैसे नहीं ले सकते जो मिली नहीं’
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उपभोक्ताओं से उन सेवाओं के लिए पैसे नहीं लिए जा सकते जो अब उपलब्ध नहीं हैं। दिल्ली विद्युत नियामक आयोग की अपील पर सुनवाई करते हुए अदालत ने एपीटीईएल के आदेश को रद्द कर दिया। मामले में, मार्च 2018 के बाद उपभोक्ताओं को बिजली की आपूर्ति नहीं की गई थी।

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि उपभोक्ताओं से उस सेवा के लिए पैसे नहीं मांगे जा सकते जो उन्हें अब नहीं मिल रही है। अदालत आगे कहा कि शुल्क निर्धारण करना सिर्फ एक गणितीय अभ्यास नहीं है, बल्कि एक नियामक संतुलन बनाने का कार्य है। जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने दिल्ली विद्युत नियामक आयोग (डीईआरसी) की अपील पर अपना फैसला सुनाया। इस अपील में एपीटीईएल के आदेश को चुनौती दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले वर्ष फरवरी में विद्युत अपीलीय न्यायाधिकरण (एपीटीईएल) के उस आदेश को रद्द कर दिया था जिसमें निर्देश दिया गया था कि दिल्ली स्थित रिठाला संयुक्त चक्र विद्युत संयंत्र की संपूर्ण पूंजी लागत को 15 वर्षों की अवधि में मूल्यह्रास के माध्यम से वसूल करने की अनुमति दी जाए।पीठ
ने कहा कि इस मामले में, यह बात मानी गई है कि मार्च 2018 के बाद उपभोक्ताओं को बिजली की आपूर्ति नहीं की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उपभोक्ताओं से ऐसी सेवा के लिए पैसे नहीं मांगे जा सकते जो उन्हें अब नहीं मिल रही है। पीठ ने कहा कि बिजली खरीद समझौते (पीपीए) के तहत, टाटा पावर दिल्ली डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड (टीपीडीडीएल) को सिर्फ छह साल की अवधि के लिए बिजली की आपूर्ति करनी थी। पीठ ने अपील मंजूर करते हुए कहा कि इस अपील में विचार के लिए उठने वाले कानूनी प्रश्न का जवाब आयोग के पक्ष में और टीपीडीडीएल के खिलाफ दिए जाते हैं। एपीटीईएल द्वारा 10 फरवरी, 2025 को दिया गया विवादित फैसला रद्द किया जाता है और आयोग द्वारा 11 नवंबर, 2019 को दिया गया आदेश बहाल किया जाता है।
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