पादरियों के प्रवेश पर रोक वाली होर्डिंग के खिलाफ याचिका खारिज
सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ में पादरियों और धर्मांतरित ईसाइयों के प्रवेश पर रोक से संबंधित याचिका खारिज कर दी। हाईकोर्ट ने पहले कहा था कि धर्मांतरण पर रोक लगाने के लिए होर्डिंग असंवैधानिक नहीं हैं। याचिकाकर्ता ने नए तथ्य और दस्तावेज पेश किए, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ के कुछ गांवों में पादरियों और धर्मांतरित ईसाइयों के प्रवेश पर कथित रोक से संबंधित होर्डिंग के सिलसिले में हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका सोमवार को खारिज कर दी। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने इस तरह के होर्डिंग को हटाने के अनुरोध वाली दो अलग-अलग याचिकाओं का पिछले साल अक्तूबर में निपटारा किया था। हाईकोर्ट ने शीर्ष अदालत के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा था कि लालच या धोखाधड़ी के जरिये धर्मांतरण पर लगाम लगाने के लिए होर्डिंग लगाने के कदम को असंवैधानिक नहीं कहा जा सकता। हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका न्यायमूर्ति विक्रमनाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता के समक्ष सुनवाई के लिए आई।
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कॉलिन गोंजाल्विस ने पादरियों पर कथित हमलों से संबंधित एक अलग मामले का हवाला दिया, जो सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि हाईकोर्ट के समक्ष दायर याचिका सीमित थी, लेकिन याचिकाकर्ता ने अब सुप्रीम कोर्ट में दायर अर्जी में कई नये तथ्य और दस्तावेज शामिल किए हैं। दलीलें सुनने के बाद पीठ ने याचिका खारिज कर दी।

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