शीर्ष कोर्ट ने अनुवाद की खराब गुणवत्ता पर चिंता जताई
सुप्रीम कोर्ट ने कानूनी सहायता अपीलों में दस्तावेजों के खराब अनुवाद पर चिंता जताई। कोर्ट ने हाईकोर्ट्स को निर्देश दिया कि वे इस मुद्दे की गंभीरता से जांच करें और चार सप्ताह में निर्णय लें। जस्टिस करोल और जस्टिस सिंह ने अनुवाद की गुणवत्ता में सुधार के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) को मंजूरी दी।

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कानूनी सहायता मामलों में अपील दायर करने के लिए दस्तावेजों के खराब अनुवाद पर चिंता जताई। शीर्ष अदालत ने देश भर के हाईकोर्ट को निर्देश दिया कि वे इस मुद्दे की गंभीरता से जांच करें और चार सप्ताह में इस पर निर्णय लें। जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन कोटिस्वर सिंह की पीठ ने कानूनी सहायता अपील दायर करने के लिए रिकॉर्ड के अनुवाद और भेजने के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) को मंजूरी देते हुए यह निर्देश पारित किया। पीठ ने कहा कि हम यह देख रहे हैं कि अनुवाद की खराब गुणवत्ता ने हाल ही में कई मौकों पर इस कोर्ट का ध्यान खींचा है, जिससे यह संकेत मिलता है कि इस संबंध में किसी प्रकार के संरचनात्मक बदलाव की जरूरत है।
संबंधित हाईकोर्ट इस मुद्दे की गंभीरता से जांच करें और एक समय-सीमा के भीतर, यानी चार सप्ताह से अधिक नहीं, इस पर निर्णय लें।
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