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प्रदूषण के कई कारण, सिर्फ किसान जिम्मेदार नहीं : शीर्ष कोर्ट

प्रदूषण के कई कारण, सिर्फ किसान जिम्मेदार नहीं : शीर्ष कोर्ट

संक्षेप:

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण के लिए किसानों को जिम्मेदार ठहराने की प्रवृत्ति पर सवाल उठाया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि प्रदूषण के कई कारण हैं और पराली जलाना केवल एक मौसमी कारक है। कोर्ट ने वायु प्रदूषण के अन्य कारणों की रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है।

Mon, 1 Dec 2025 06:53 PMNewswrap हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण के लिए किसानों को जिम्मेदार ठहराने की प्रवृत्ति पर सवाल उठाते हुए कहा कि राजधानी की जहरीली हवा के कई कारण हैं। शीर्ष अदालत ने कहा कि कोरोना महामारी के दौरान भी पराली जलाई जा रही थी, तब भी हमारा आसमान नीला था, जितना पहले कभी नहीं था, ऐसे में दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण के लिए किसानों को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण कम करने से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि पराली जलाने को लेकर चल रही बातें किसी के लिए भी ‘राजनीतिक मुद्दा या अहं का विषय’ नहीं होना चाहिए।

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मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि पहले यह देखना जरूरी है कि वैज्ञानिक विश्लेषण के मुताबिक पराली जलाने के अलावा सबसे अधिक किस कारण से प्रदूषण हो रहा है? हम पराली जलाने पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते। उन लोगों (किसानों) पर दोष मढ़ना बहुत आसान होता है, जिनका कोर्ट में शायद ही कोई प्रतिनिधित्व होता है। अगर कोई किसान पराली जला रहा है, तो वह भी एक एसेट के लिए है, यह एक कमोडिटी है। प्रदूषण के अन्य कारणों की रिपोर्ट जल्द दें इसके साथ ही, शीर्ष अदालत ने ही कहा कि बहुत जल्द, हम एक सप्ताह में पराली जलाने के अलावा प्रदूषण के लिए दूसरी वजहों को रोकने के लिए प्रभावी तरीकों पर एक रिपोर्ट चाहते हैं। पीठ ने वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से वायु प्रदूषण के दूसरे कारकों के बारे में रिपोर्ट पेश करने को कहा है। कार्य योजना की समीक्षा करें शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार और दिल्ली-एनसीआर में शामिल राज्यों वायु प्रदूषण कम करने के लिए बनाए गए अपने कार्य योजना की समीक्षा करने को कहा है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि आप अपने एक्शन योजना पर फिर से विचार क्यों नहीं करते ताकि आप खुद देख सकें कि इससे कोई असरदार बदलाव लाया है या नहीं? और अगर आया है तो क्या वे जरूरत से कम हैं? उन्होंने कहा कि इस बारे में आपकी हिचकिचाहट या भरोसे के बावजूद कि आप असरदार बदलाव ला पाएंगे या नहीं। लक्ष्य हासिल नहीं हुआ इस पर ‌ अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने शीर्ष अदालत को बताया कि पंजाब, हरियाणा और सीपीसीबी सहित सभी प्राधिकरणों की कार्रवाई रिपोर्ट दायर की जाएगी। उन्होंने पीठ से कहा कि सभी राज्यों के लिए लक्ष्य ‘शून्य जलाना’ यानी पराली जलाने को पूरी तरह से खत्म करना था, जो हासिल नहीं हुआ है। हालांकि उन्होंने पीठ से कहा कि पराली जलाना केवल एक मौसमी कारक है। निर्माण गतिविधि भी प्रदूषण का प्रमुख कारण इस पर जस्टिस बागची ने निर्माण गतिविधि भी प्रदूषण का एक अन्य प्रमुख कारण बताते हुए सवाल किया कि निर्माण प्रतिबंध को जमीन पर कितनी प्रभावी रूप से लागू किया गया है। इस पर अतिरिक्त सॉलिसिटर जरनल भाटी ने पीठ से कहा कि सरकार के हलफनामे में वाहनों, निर्माण, धूल और पराली जलाने से होने वाले योगदान पर श्रेणीवार आंकड़े दिए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इसके साथ ही, वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के सदस्यों की विशेषज्ञता और पृष्ठभूमि के बारे में विस्तार से जानकारी देने को कहा है। मामले की सुनवाई अब 10 दिसंबर को होगी।