
नेताओं द्वारा भेदभावपूर्ण टिप्पणी के खिलाफ याचिका दायर
सुप्रीम कोर्ट में 12 व्यक्तियों ने सार्वजनिक अधिकारियों द्वारा भेदभावपूर्ण टिप्पणियों के खिलाफ दिशा-निर्देशों की मांग की है। याचिका में नजीब जंग, रूप रेखा वर्मा और जॉन दयाल शामिल हैं, जिन्होंने आरोप लगाया है कि ये टिप्पणियाँ संविधान की नैतिकता का उल्लंघन करती हैं। इसमें असम, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्रियों की विवादास्पद टिप्पणियों का जिक्र किया गया है।
सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल पर 12 लोगों ने सार्वजनिक अधिकारियों और संवैधानिक पदाधिकारियों द्वारा की गई भेदभावपूर्ण टिप्पणियों के खिलाफ दिशा-निर्देशों की मांग की है। उनका तर्क है कि ऐसे बयान संवैधानिक नैतिकता का उल्लंघन करते हैं और संविधान के मूल्यों को कमजोर करते हैं। याचिकाकर्ताओं में दिल्ली के पूर्व उपराज्यपाल नजीब जंग, दर्शनशास्त्र की प्रोफेसर और कार्यकर्ता रूप रेखा वर्मा और राजनीतिक कार्यकर्ता जॉन दयाल आदि शामिल हैं। याचिका में हाल के वर्षों में वरिष्ठ सार्वजनिक अधिकारियों द्वारा की गई विशिष्ट टिप्पणियों का उल्लेख किया गया है। इनमें असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के वे बयान भी शामिल हैं, जिन पर आरोप है कि उन्होंने लोगों को मुसलमानों को परेशान करते रहने के लिए प्रोत्साहित किया और ऐसी टिप्पणियों को उचित ठहराने के लिए सुप्रीम कोर्ट के शब्दों का गलत इस्तेमाल किया।
इसमें उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा कथित तौर पर बार-बार आपत्तिजनक शब्दों का जिक्र किया गया। इसके अलावा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा विधानसभा में की गई कथित टिप्पणी का भी उल्लेख किया गया है। इसके अतिरिक्त, याचिका में महाराष्ट्र के मंत्री नितेश राणे की भी टिप्पणियों का भी उल्लेख है।

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