बिहार में दीपक प्रकाश को दोबारा मंत्री बनाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल

हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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नई दिल्ली में, राष्ट्रीय लोक मार्चा के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश के दोबारा मंत्री बनाए जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। याचिका में कहा गया है कि दीपक प्रकाश राज्य विधानमंडल के सदस्य नहीं हैं और उन्हें पद से हटाने की मांग की गई है।

बिहार में दीपक प्रकाश को दोबारा मंत्री बनाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल

नई दिल्ली, विशेष संवाददाता। राष्ट्रीय लोक मार्चा (आरएलएम) के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश को बिहार में दोबारा मंत्री बनाए जाने के खिलाफ सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई। याचिका में कहा गया है कि दीपक प्रकाश राज्य विधानमंडल के किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं और इसके बावजूद मंत्री पद पर बने हुए हैं। याचिका में उन्हें पद से हटाने की मांग की गई है। राकेश कुमार सिंह की ओर से दाखिल याचिका में बिहार सरकार को यह बताने का निर्देश देने की मांग की गई है कि प्रकाश किस कानूनी और संवैधानिक आधार पर बिहार सरकार में मंत्री पद पर बने हुए हैं। याचिका में सात मई को दीपक प्रकाश को दोबारा मंत्री बनाए जाने, पद पर बने रहने को असंवैधानिक, गैर-कानूनी और संविधान के अनुच्छेद 164(4) के खिलाफ बतााया गया है। अनुच्छेद 164(4) किसी ऐसे व्यक्ति को मंत्री नियुक्त करने की अनुमति देता है जो विधायक नहीं है, लेकिन यह केवल एक अस्थायी अपवाद के तौर पर होता है। ऐसे व्यक्ति को छह महीने के भीतर राज्य विधानमंडल की सदस्यता हासिल करनी होती है। सदन की सदस्यता नहीं लेने पर पर मंत्री को पद छोड़ना पड़ता है。

याचिका की जानकारी

अधिवक्ता सान्य कौशल के जरिए दाखिल याचिका में कहा गया है कि राष्ट्रीय लोक मोर्चा के नेता प्रकाश ने पहली बार 20 नवंबर, 2025 को नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली सरकार में पंचायती राज मंत्री के तौर पर शपथ ली थी, जबकि वे बिहार विधानसभा या बिहार विधान परिषद के निर्वाचित सदस्य नहीं थे। याचिका में कहा गया है कि अनुच्छेद 164(4) के तहत छह महीने की संवैधानिक समय-सीमा उसी तारीख से शुरू हुई थी और यह लगभग 19 मई, 2026 को खत्म होने वाली थी। याचिका में कहा गया है कि हालांकि, अप्रैल 2026 में राजनीतिक स्थिति बदल गई जब नीतीश कुमार ने इस्तीफा दे दिया और मंत्रिपरिषद भंग हो गई। इसमें कहा गया कि इसके बाद 15 अप्रैल, 2026 को सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली। 22 दिनों के इस अंतरिम समय के दौरान, प्रकाश किसी मंत्री पद पर नहीं थे। याचिका में कहा गया कि 7 मई, 2026 को बिहार मंत्रीमंडल के विस्तार के दौरान दीपक प्रकाश को दोबारा पंचायती राज मंत्री नियुक्त किया गया, जबकि उन्होंने बिहार विधानमंडल के किसी भी सदन की सदस्यता हासल नहीं की है।

संवैधानिक मुद्दे

याचिका में कहा गया है कि सरकार किसी मंत्री के कार्यकाल को तोड़कर और थोड़े अंतराल के बाद उसी व्यक्ति को दोबारा नियुक्त करके संवैधानिक सीमा को दरकिनार नहीं कर सकती। याचिका में कहा गया है कि ऐसी कार्रवाई संवैधानिक शक्ति का दिखावटी इस्तेमाल है, जिसका मकसद अप्रत्यक्ष रूप से वह हासिल करना है जो सीधे तौर पर नहीं किया जा सकता। याचिका में यह भी कहा गया है कि यह मामला सिर्फ दीपक प्रकाश की नियुक्ति का नहीं है, बल्कि संसदीय लोकतंत्र, संवैधानिक जवाबदेही और संविधान के तहत कार्यकारी शक्ति की सीमाओं की रक्षा का है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दीपक प्रकाश को कब दोबारा मंत्री बनाया गया?
दीपक प्रकाश को 7 मई, 2026 को बिहार मंत्रीमंडल के विस्तार के दौरान दोबारा पंचायती राज मंत्री नियुक्त किया गया।
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