न्यायिक अधिकारी, उनके परिवार को सुरक्षा देने का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में एक न्यायिक अधिकारी को मिली धमकियों के मद्देनजर पुलिस को सुरक्षा प्रदान करने का निर्देश दिया है। 2008 में अपहरण का शिकार हुए इस अधिकारी को दोषियों से खतरे का सामना करना पड़ रहा है। कोर्ट ने कहा कि दोषियों को पैरोल या सजा में छूट देने से पहले हाईकोर्ट की अनुमति लेनी होगी।

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में सेवारत एक न्यायिक अधिकारी को मिल रही धमकियों के मद्देनजर पुलिस को पर्याप्त सुरक्षा प्रदान करने का गुरुवार को निर्देश दिया। अधिकारी का 2008 में अपहरण कर लिया गया था और अब उन्हें इस मामले में दोषी ठहराए गए लोगों से धमकियां मिल रही हैं। यह घटना उस समय हुई थी जब वह नाबालिग थे। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने गुजरात पुलिस को याचिकाकर्ता के भाई को खतरे की आशंका का आकलन करने और यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि उन्हें कोई नुकसान न पहुंचे। याचिकाकर्ता के भाई भी न्यायिक अधिकारी हैं।
अदालत ने सेवारत न्यायिक अधिकारी द्वारा दायर याचिका पर यह आदेश पारित किया। इसमें अधिकारियों को निर्देश देने का अनुरोध किया गया कि अपहरण मामले में दोषी ठहराए गए और आजीवन कारावास की सजा प्राप्त लोगों की धमकियों के मद्देनजर उन्हें और उनके परिवार के सदस्यों को पर्याप्त सुरक्षा प्रदान की जाए।शीर्ष अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि संबंधित हाईकोर्ट की अनुमति के बिना दोषियों को पैरोल या सजा में छूट नहीं दी जाएगी। पीठ ने कहा कि दोषियों द्वारा सजा में छूट के अनुरोध वाली याचिका पर विचार कर रहा पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट अगर उन्हें पैरोल या रियायत प्रदान करता है तो आदेश को दो सप्ताह तक प्रभावी नहीं किया जाएगा ताकि याचिकाकर्ता उचित उपचारात्मक कदम उठा सके। शीर्ष अदालत ने कहा कि हरियाणा के कुरुक्षेत्र में, जहां याचिकाकर्ता का परिवार रहता है, संबंधित अधिकारियों की यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी होगी कि उन्हें कोई नुकसान न पहुंचे।
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