
बर्खास्त सफाई कर्मियों को एक घंटे में बहाल करें यूपी : शीर्ष कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने वाराणसी में बाल तस्करी के मामले में संविदा सफाई कर्मियों की बर्खास्तगी पर कड़ी आपत्ति जताई। अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिया कि एक घंटे में दोनों को बहाल किया जाए, अन्यथा संबंधित अधिकारी को निलंबित किया जाएगा। मां का एक वर्षीय बच्चा अगवा हुआ था, जो अब बाल तस्करी का मामला बन गया है।
कहा, ऐसा न होने पर अधिकारी को निलंबित कर दिया जाएगा वाराणसी में सफाई कर्मी के बच्चे को अगवा करने का मामला नई दिल्ली, एजेंसी। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को अदालत के समक्ष बाल तस्करी का मुद्दा उठाने पर उत्तर प्रदेश के वाराणसी नगर निगम में संविदा सफाईकर्मी पति-पत्नी को बर्खास्त किए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई। अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार को एक घंटे में दोनों सफाई कर्मियों को बहाल करने का निर्देश दिया। न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति के.वी. विश्वनाथन की पीठ को वरिष्ठ अधिवक्ता और न्यायमित्र अपर्णा भट्ट ने बताया कि पिंकी नामक महिला ने यह आरोप लगाते हुए मामला दायर किया कि उसे और उसके पति को संविदा नियोक्ता ने नौकरी से बर्खास्त कर दिया है।
पीठ ने उत्तर प्रदेश के वकील से कहा कि हम चाहते हैं कि उन्हें एक घंटे में बहाल किया जाए, अन्यथा संबंधित अधिकारी को निलंबित कर दिया जाएगा। हम अपडेट स्थिति जानना चाहते हैं। सिर्फ इसलिए कि उन्होंने अदालत का रुख किया, अधिकारी नाराज हो गए। हम इसे हल्के में नहीं लेंगे। पीठ ने वकील से कहा कि वह संबंधित अधिकारियों को फोन करें और अदालत को उनकी बहाली के बारे में सूचित करें। मां के बगल में सो रहा बच्चा अगवा हुआ था पिंकी के एक वर्षीय बच्चे बाहुबली को वाराणसी के नदेसर कैंट से उस समय अगवा कर लिया गया, जब वह उसके बगल में सो रहा था। यह अपहरण एक संगठित अंतरराज्यीय बाल-तस्करी गिरोह के सदस्यों द्वारा किया गया था। बेटे के लापता होने पर, पिंकी ने अगले दिन वाराणसी के कैंट थाने में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद 30 अप्रैल, 2023 को एक प्राथमिकी दर्ज की गई। बाद में मामला बाल तस्करी का निकला शुरुआत में पुलिस रिपोर्ट में संकेत दिया गया था कि पिंकी की शिकायत एक लापता बच्चे के बारे में थी, लेकिन बाद में यह मामला बाल तस्करी का निकला। इस मामले में कई गिरफ्तारियां की गईं और इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आरोपियों को जमानत दे दी, जिसे पिंकी और अन्य ने शीर्ष अदालत में चुनौती दी। हाईकोर्ट का आदेश दोषपूर्ण शीर्ष अदालत ने इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा आरोपियों को जमानत पर रिहा करने के आदेशों को दोषपूर्ण पाया और कहा कि अपराध की गंभीर प्रकृति को देखते हुए आरोपियों को राहत नहीं दी जानी चाहिए थी।

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