सड़का हादसा पीड़ितों को कैशलेस इलाज और बीमा कवरेज देने का मुद्दा जस्टिस सप्रे समिति को भेजा

Nov 25, 2025 07:23 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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सुप्रीम कोर्ट ने सड़क हादसा पीड़ितों को कैशलेस इलाज और बीमा कवरेज का लाभ देने के लिए नीति बनाने का आदेश दिया है। जस्टिस अभय मनोहर सप्रे की अगुवाई में समिति को 6 सप्ताह में रिपोर्ट देने के लिए कहा गया है। याचिका में केंद्र सरकार से मोटर वाहन अधिनियम के तहत योजना बनाने की मांग की गई है।

सड़का हादसा पीड़ितों को कैशलेस इलाज और बीमा कवरेज देने का मुद्दा जस्टिस सप्रे समिति को भेजा

नई दिल्ली। विशेष संवाददाता सुप्रीम कोर्ट ने सड़क हादसा पीड़ितों को कैशलेस इलाज और बीमा कवरेज का पूरा लाभ देने के लिए नीति बनाने का आदेश देने की मांग से जुड़े मुद्दे को सड़क सुरक्षा पर बनी जस्टिस अभय मनोहर सप्रे कमेटी को भेज दिया है। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस सप्रे की अगुवाई में गठित समिति को शीर्ष अदालत ने इस पर विचार करने के बाद 6 सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट देने को कहा है। जस्टिस जेबी पारदीवाला और केवी विश्वनाथन की पीठ ने 2012 से लंबित जनहित याचिका में दाखिल अर्जी पर विचार करते हुए यह मुद्दा समिति के विचारार्थ भेजा है।

शीर्ष अदालत में यह अर्जी डॉ. एस राजसीकरन (गंगा हॉस्पिटल, कोयंबटूर के ऑर्थोपेडिक सर्जरी डिपार्टमेंट के चेयरमैन और हेड) ने सड़क हादसे में हुई मौतों का जिक्र करते हुए अर्जी दाखिल की है। शीर्ष अदालत में दाखिल इस अर्जी में केंद्र सरकार को मोटर वाहन अधिनियम की धारा 162(1) के तहत एक योजना बनाने का आदेश देने की मांग की गई है, जिससे बीमा कंपनियों को सड़क हादसे के पीड़ितों को हॉस्पिटल में कैशलेस इलाज देने की जरूरत हो, जो मोटर वाहन बीमा कवर के तहत फायदे के हकदार हैं और साथ ही, समय-समय पर, इनवॉइस और सपोर्टिंग डॉक्यूमेंट जमा करने के 2 सप्ताह के भीतर पीड़ितों को समय पर वित्तीय मदद और अस्पताल से छुट्टी के बाद बिना किसी रुकावट के मेडिकल देखभाल के लिए, मेडिकल खर्चों का भुगतान भी करना होगा। अर्जी में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने इसी साल जनवरी में, केंद्र सरकार को गोल्डन आवर्स के लिए सिर्फ मोटर वाहन अधिनियम की धारा 162(2) के तहत एक कैशलेस इलाज की योजना बनाने का निर्देश दिया था। अर्जी में भारत बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण को यह सुनिश्चित करने का आदेश देने की मांग की है कि वह सभी जनरल इंश्योरेंस कंपनियों को एमवी एक्ट की धारा 162(1) के तहत बनाई गई स्कीम का प्रभावी तरीके के पालन करने का आदेश दें ताकि सड़क दुर्घटना के शिकार लोगों के कैशलेस इलाज (हॉस्पिटल में और हॉस्पिटल के बाद) के लिए पूरा कवरेज दें। शीर्ष अदालत में दाखिल अर्जी में कहा गया है कि इलेक्ट्रॉनिक-डिटेल्ड एक्सीडेंट रिपोर्ट (ई-डार) के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि लगभग 60 फीसदी सड़क दुर्घटनाओं में थर्ड पार्टी कवरेज वाले मोटर वाहन शामिल होते हैं।

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