पश्चिम बंगाल: न्यायिक अधिकारियों की घेराबंदी में पुलिस पर गंभीर आरोप, एनआईए ही करेगी जांच- सुप्रीम कोर्ट

Apr 06, 2026 07:54 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में न्यायिक अधिकारियों पर हमले की जांच एनआईए को सौंप दी है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि राज्य पुलिस पर गंभीर आरोप हैं और स्वतंत्र जांच की आवश्यकता है। इसके साथ ही, चुनाव बाद भी केंद्रीय बलों की तैनाती जारी रहेगी।

पश्चिम बंगाल: न्यायिक अधिकारियों की घेराबंदी में पुलिस पर गंभीर आरोप, एनआईए ही करेगी जांच- सुप्रीम कोर्ट

पश्चिम बंगाल के सरकारी तंत्र की साख गिर रही है और सचिवालय और सरकारी दफ्तरों में राजनीति घुस रही है- सीजेआई प्रभात कुमारनई दिल्ली।सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के कार्य में लगे न्यायिक अधिकारियों की घेराबंदी और उन पर हमला किए जाने की घटना की जांच एनआईए ही करेगी। शीर्ष अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी असाधारण शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए न्यायिक अधिकारियों के घेराव और उन पर हमला को लेकर दर्ज सभी मामलों की जांच एनआईए को सौंप दिया। देश के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने कहा कि ‘पश्चिम बंगाल के सरकारी तंत्र की साख गिर रही है और सचिवालय और सरकारी दफ्तरों में राजनीति घुस रही है।’सीजेआई

सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और विपुल एम पंचोली की पीठ ने ‘एनआईए को न्यायिक अधिकारियों को घेराव करने की घटना को लेकर स्थानीय पुलिस द्वारा दर्ज की गई सभी 12 प्राथमिकी की जांच अपने हाथ में ले, भले ही वे प्राथामिकी (एफआईआर) किसी भी प्रावधान के तहत दर्ज की गई हों। दूसरे शब्दों में, चाहे एनआईएक एक्ट के तहत आने वाले अपराध लागू होते हों या नहीं, लेकिन एनआईए इन मामलों की जांच कर सकती है।’ पीठ ने 1 अप्रैल को मालदा जिले कालियाचक 3 महिला सहित 7 न्यायिक अधिकारियों को आधी रात तक 9 घंटे से अधिक समय तक बंधक बनाए जाने की घटना पर स्वतः संज्ञान लिया था। इस मामले में पीठ ने भारत के निर्वाचन आयोग को निर्देश दिया था कि वह सीबीआई या एनआईए जैसी किसी स्वतंत्र एजेंसी से इन घटनाओं की शुरुआती जांच करवाए। ‌मामले की सुनवाई से दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि घटना की जांच को लेकर पेश की गई स्थिति रिपोर्ट को देखने के बाद हम पाते हैं कि ‘राज्य पुलिस पर गंभीर आरोप है, ऐसे में किसी केंद्रीय एजेंसी द्वारा स्वतंत्र जांच जरूरी है। उन्होंने कहा कि ऐसे में अनुच्छेद 142 के तहत अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए, घटना को लेकर दर्ज सभी मामलों की जांच एनआईए को सौंपते हैं।’ पीठ ने साफ किया कि अगर जांच के दौरान के दौरान यह पाया जाता है कि और भी अपराध हुए हैं, या अपराधों का दायरा अधिक बड़ा है, या इसमें और भी लोग शामिल हैं, तो एनआईए अतिरिक्त एपआईआर दर्ज कर सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले में जांच रिपोर्ट कोलकाता स्थिति एनआईए कोर्ट में पेशश करने को कहा है। साथ-साथ ही, समय-समय पर मामले की रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में भी पेश करने का आदेश दिया है। पीठ ने राज्य पुलिस को सभी मामलों की जांच एनआईए को सौंपने का आदेश दिया।इससे पहले, एनआईए की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने पीठ को बताया कि तीन घटनाओं में सीधे तौर पर न्यायिक अधिकारी को परेशान किया गया। उन्होंने कहा कि एक घटना में, एक न्यायिक अधिकारी को कार्यक्रम स्थल तक पहुंचने से रोका गया, जबकि दूसरी घटना में कार्यक्रम स्थल पर न्यायिक अधिकारियों का घेराव किया गया। उन्होंने कहा कि न्यायिक अधिकारियों से जुड़ी घटनाओं के संबंध में सीधे तौर पर कुल तीन प्राथमिकी दर्ज की गई थीं, जबकि नौ अतिरिक्त प्राथमिकी दर्ज की गई जो आस-पास के इलाकों में रुकावटों से संबंधित थीं। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने पीठ से कहा कि सभी मामलों की जांच एनआईए को दी जा सकती है। पीठ को बताया कि 24 आरोपियों की पहचान उपद्रवियों के रूप में की गई थी और इनमें से 5 का आपराधिक इतिहास रहा है। साथ ही कहा कि 24 के पार्टी सदस्य होने का संदेह है और अब इन घटनाओं के संबंध में 432 लोगों की पहचान की गई है और कॉल डिटेल रिकॉर्ड का विश्लेषण चल रहा है। पीठ ने कहा है कि जिन 26 लोगों को मालदा घटना के सिलसिले में राज्य पुलिस द्वारा गिरफ्तार किया है, एनआईए उनसे पूछताछ कर सकती है, भले ही वे न्यायिक हिरासत में हों।मुख्य सचिव को फटकाासुप्रीम कोर्ट ने 1 अप्रैल को घटना वाले दिन, जब न्यायिक अधिकारियों का घेराव हुआ था, उस दिन कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश का फोन नहीं उठाने के लिए पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव दुष्यंत नारियाला को फटकार लगाई। पीठ ने मुख्य सचिव से कहा कि वे फोन न उठाने के लिए कलकत्ता हाई‌कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से माफी मांगे। इससे पहले, मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने पीठ से कहा कि दो मुख्य सरगनाओं - मोफाकरुल इस्लाम और मौलाना मुहम्मद शाहजहां अली कादरी को स्थानीय पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर चुकी चुकी है और वे अभी पुलिस हिरासत में हैं। इस बात का संज्ञान लेते हुए, पीठ ने निर्देश दिया कि अब तक गिरफ्तार किए गए लोगों से एनआईए पूछताछ करेगी और पुलिस को आदेश दिया कि उनकी हिरासत केंद्रीय जांच इस एजेंसी को सौंप दी जाए।पश्चिम बंगाल में चुनाव बाद भी तैनात रहेंगे केंद्रीय बल- सुप्रीम कोर्टसुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि पश्चिम बंगाल में हाल की घटनाओं को ध्यान में रखते हुए चुनाव बाद भी केंद्रीय पुलिस बल तैनात रहेंगे। यह टिप्पणी करते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में मतदाता सूचियों के चल रहे विशेष गहन संशोधन में मतदाता सूची से हटाए गए लोगों के लगभग 60 लाख दावों और आपत्तियों पर सोमवार को फैसला किया जाएगा।मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जॉयमाल्य बागची और विपुल एम पंचोली की पीठ ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के पत्र का हवाला दिया और कहा कि न्यायिक अधिकारियों ने 6 अप्रैल को दोपहर तक लगभग 60 लाख मामलों में से 59.15 लाख से अधिक दावों और आपत्तियों पर फैसला कर लिया था। सीजेआई ने कहा कि ‘अतीत में जिस तरह की घटनाएं हुई हैं, उसे देखते हुए पश्चिम बंगाल से केंद्रीय बलों को वापस नहीं बुलाया जाएगा। उन्होंने आगे कहा कि अगर राज्य की मशीनरी विफल होती है, तो हम देखेंगे कि क्या किया जा सकता है।’ उन्होंने टिप्पणी की कि मालदा जिले में भी, जहां कथित तौर पर न्यायिक अधिकारियों को घेराव सहित बाधाओं का सामना करना पड़ा था, लगभग आठ लाख मामलों का निपटारा कर दिया गया था। इससे पहले, निर्वाचन आयोग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता डी.एस. नायडू ने पीठ से कहा कि शेष दावों पर आज ही 6 अप्रैल को ही किया जाएगा और देर रात एक पूरक मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी। पीठ ने लंबित डिजिटल हस्ताक्षर अपलोड को पूरा करने के लिए 7 अप्रैल तक का समय भी दिया।मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने कहा कि मतदाताओं को सूची से हटाने के खिलाफ चुनौतियों की सुनवाई के लिए गठित 19 अपीलीय न्यायाधिकरण अभी तक पूरी तरह से काम करना शुरू नहीं कर पाए हैं। इस पर शीर्ष अदालत ने कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को इन न्यायाधिकरणों के लिए एक समान प्रक्रिया तैयार करने हेतु पूर्व वरिष्ठ न्यायाधीशों का तीन सदस्यीय पैनल गठित करने का निर्देश दिया। पैनल से 7 अप्रैल तक दिशानिर्देशों को अंतिम रूप देने के लिए कहा गया है ताकि अपीलों का शीघ्र निपटारा सुनिश्चित किया जा सके। पीठ ने स्पष्ट किया कि न्यायाधिकरणों के पास मतदाता सूचियों में शामिल करने या हटाने के कारणों की जांच करने और ऑनलाइन अपलोड न किए गए रिकॉर्ड सहित दस्तावेजी साक्ष्यों की समीक्षा करने का अधिकार होगा।

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