त्वरित सुनवाई को विशेष अदालतों की स्थापना का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को एनआईए द्वारा जांच किए गए मामलों की तेजी सुनवाई के लिए एक विशेष अदालत स्थापित करने का आदेश दिया है। अदालत ने केंद्र को उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों से संपर्क करने और विशेष अदालतों की स्थापना पर विचार करने के लिए एक माह का समय दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इसके लिए एक माह का समय दिया नई दिल्ली, विशेष संवाददाता।
विशेष अदालतों की स्थापना
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) द्वारा जांच किए गए मामलों में तेजी सुनवाई पूरी करने के लिए 10 से 15 लंबित मुकदमों से निपटने के लिए कम से कम एक विशेष अदालत स्थापित करने का आदेश दिया है। शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार को इसके लिए एक माह का वक्त दिया है।
मुख्य न्यायाधीश का आदेश
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने केंद्र सरकार को यह आदेश दिया है कि वह संबंधित उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों से संपर्क करे और एनआईए अधिनियम, 2008 की धारा 11 के तहत विशेष अदालतें स्थापित करने के लिए विचार विमर्श करें। एनआईए अधिनियम की धारा-11 केंद्र सरकार की विशेष अदालतें गठित करने की शक्ति से संबंधित है। मुख्य न्यायाधीश ने अपने आदेश में कहा कि हम उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों से आग्रह करते हैं कि वे राज्य सरकारों से परामर्श करके विशेष अदालतें स्थापित करने के लिए आवश्यक और पर्याप्त जगह उपलब्ध कराएं, जहां पीठासीन अधिकारियों को मामलों की सुनवाई का जिम्मा सौंपा जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने एनआईए द्वारा दर्ज और जांच किए गए मामलों की सुनवाई में देरी पर स्वत: संज्ञान लेकर शुरू की गई याचिका पर विचार करते हुए यह आदेश दिया। शीर्ष अदालत ने एनआईए के मामलों के लिए गठित होने वाली विशेष अदालतों को कोई अन्य मामले सुनवाई के लिए नहीं सौंपे जाएंगे और सुनवाई दिन-प्रतिदिन के आधार पर की जाएगी। शीर्ष अदालत ने कहा कि विशेष अदालत के जज को मामलों को अपनी इच्छानुसार सूचीबद्ध करने की स्वतंत्रता होगी, बशर्ते यह सुनिश्चित किया जाए कि कम से कम एक मुकदमा एक महीने के भीतर पूरा हो जाए।
अगली सुनवाई की तिथि
पीठ ने केंद्र से कहा कि हम यह स्पष्ट करते हैं कि 10 से 15 लंबित मुकदमों के लिए कम से कम एक विशेष अदालतें गठित हों। साथ ही कहा कि यदि कही, 15 से अधिक मामले लंबित हैं तो वहां दो विशेष अदालत का गठन किया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों के महाधिवक्ताओं से कहा कि वे हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल के परामर्श से, अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में लंबित मुकदमों का विवरण प्रस्तुत करें। अब मामले की अगली सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में जुलाई में होगी।
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