सुपरटेक की 16 परियोजनाओं को पूरा करेगी एनबीसीसी
सुप्रीम कोर्ट ने रियल एस्टेट कंपनी सुपरटेक की रुकी हुई 16 आवासीय परियोजनाओं का काम पूरा करने के लिए एनबीसीसी को आदेश दिया है। अदालत ने खरीदारों को 12 से 36 महीने के भीतर घर का कब्जा देने का निर्देश दिया। सुप्रीम कोर्ट ने घर खरीदारों के हितों की रक्षा करने की प्राथमिकता पर जोर दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने घर पाने का इंतजार कर रहे हजारों खरीदारों को राहत दी। अदालत ने गुरुवार को रियल एस्टेट कंपनी सुपरटेक की रुकी हुई 16 आवासीय परियोजनाओं का काम पूरा करने के लिए सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी एनबीसीसी को आदेश दिया है। शीर्ष अदालत ने राष्ट्रीय कंपनी लॉ अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) के उस आदेश को बहाल रखते हुए यह फैसला दिया, जिसमें राष्ट्रीय भवन निर्माण कंपनी (एनबीसीसी) को कर्ज में डूबी रियल एस्टेट कंपनी सुपरटेक लिमिटेड के 16 आवासीय परियोजनाओं के बचे हुए कार्य को तेजी से पूरा करने और खरीदारों को 12 से 36 माह के भीतर घर का कब्जा देने के लिए कहा गया था।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने उच्च न्यायालयों और सभी ट्रिब्यूनल को भी कोई ऐसा आदेश पारित करने से रोक दिया, जिससे एनबीसीसी द्वारा इन परियोजनाओं के निर्माण कार्य में रुकावट आए। सुप्रीम कोर्ट ने घर खरीदारों को राहत देने के लिए संविधान के अनुच्छेद-142 के तहत पूर्ण न्याय देने के लिए अपनी असाधारण शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए यह फैसला दिया। एनसीएलएटी के 12 दिसंबर, 2024 को पारित अपने फैसले में एनबीसीसी को घर खरीदारों के हित में सुपरटेक की 16 परियोजनाओं को अपने हाथ में लेने का आदेश दिया। सुप्रीम कोर्ट ने अब इस फैसले को बहाल रखा। पीठ ने सभी लंबित याचिकाओं का निपटारा करते हुए पक्षकारों को चल रहे परियोजना में आने वाली किसी भी दिक्कत के मामले में सुप्रीम कोर्ट आने की छूट दी है। घर खरीदारों का हित पहली प्राथमिकता मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि हमारे लिए सबसे पहली प्राथमिकता ‘घर खरीदारों के हितों की रक्षा करना है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उन्हें वे घर मिल सकें जिनका वे पिछले दो दशकों से इंतजार कर रहे हैं और उनकी मेहनत की कमाई कथित तौर पर रियल एस्टेट फर्म द्वारा हड़प ली गई। उन्होंने कहा कि घर खरीदारों की ओर से बताया गया कि सुपरटेक ने 2010-12 के दौरान लगभग 51,000 घरों की बुकिंग की थी। एनबीसीसी को दिया निर्देश गलत नहीं था पीठ ने फैसले में कहा कि सभी तथ्यों पर विचार करने के बाद हम पाते हैं कि 12 दिसंबर, 2024 को एनसीएलएटी द्वारा पारित आदेश, जिसमें सुपरटेक की 16 रुकी हुई परियोजनाओं को पूरा करने के लिए एनबीसीसी को निर्देश दिया गया था, वह न तो अनुचित है और न ही दिवाला और दिवालियापन संहिता के प्रावधानों के विपरीत है। घर का कब्जा सभी सुविधाओं के साथ मिले शीर्ष अदालत ने फैसले में साफ किया कि परियोजना पूरा करके घर का कब्जा देते समय वे सभी सुविधाएं देने का आदेश दिया है, जो बिल्डर ने घर बेचते समय खरीदारों से किए थे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सुविधाओं पानी और बिजली की सप्लाई, सीवेज कनेक्शन, साथ ही आस-पास के इलाकों में सड़कें और पार्क शामिल हैं। एनबीसीसी को जरूरी मदद का निर्देश पीठ ने एनबीसीसी को एनसीएलएटी द्वारा बनाई गई एक विशेषज्ञ समिति द्वारा बनाए गए रोडमैप के अनुसार परियोजनाओं को तेजी से शुरू करने और पूरा करने का निर्देश दिया। पीठ ने समिति को भी परियोजना को पूरा करने में एनबीसीसी को जरूरी मदद देने का निर्देश दिया। एनसीएलएटी के निर्देश - खरीदारों को तय रकम के अलावा कुछ भी भुगतान नहीं करना है। - अच्छी क्वालिटी के कंस्ट्रक्शन को प्राथमिकता दी जाएगी। - प्रतिष्ठित संस्थानों द्वारा थर्ड-पार्टी ऑडिट किए जाएंगे। - प्रोजेक्ट्स को 12 से 36 महीनों के भीतर पूरा करना होगा।
लेखक के बारे में
Hindustanलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।


