क्षतिपूर्ति पौधारोपण के लिए भूमि खोजे बीएमसी
सुप्रीम कोर्ट ने बीएमसी को गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड परियोजना के दूसरे चरण के लिए 1,039 पेड़ों के बदले 24 एकड़ भूमि की पहचान करने का निर्देश दिया। बीएमसी ने पनवेल के निकट भूमि की पहचान के लिए समय बढ़ाने का अनुरोध किया। अदालत ने दो सप्ताह में हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को बृह्नमुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) को गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड परियोजना के दूसरे चरण के लिए काटे जाने वाले 1,039 पेड़ों के बदले क्षतिपूर्ति पौधारोपण के लिए मुंबई या आसपास के किसी स्थान पर 24 एकड़ वैकल्पिक भूमि खोजने का निर्देश दिया। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जॉयमाल्या बागची की पीठ के समक्ष गुरुवार को बीएमसी और अन्य अधिकारियों ने आग्रह किया कि मुंबई के संजय गांधी पार्क के भीतर चिह्नित कुल 27.5 एकड़ भूमि में से केवल तीन एकड़ भूमि का उपयोग क्षतिपूर्ति वृक्षारोपण के लिए किया जा सकता है। बीएमसी ने क्षतिपूर्ति वृक्षारोपण के लिए पनवेल के निकट शेष 24 एकड़ भूमि की पहचान करने और उसे चिह्नित करने के लिए समय बढ़ाने का अनुरोध किया।
प्रस्तुत दलीलों पर ध्यान देते हुए, पीठ ने बीएमसी आयुक्त को दो सप्ताह में एक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया, जिसमें उस भूमि का खुलासा किया जाए और साथ ही उस सटीक स्थान का भी उल्लेख किया जाए, जहां नगर निकाय क्षतिपूर्ति वृक्षारोपण करना चाहता है। दरअसल, अदालत ने 17 नवंबर, 2025 को बीएमसी के वृक्ष प्राधिकरण को लिंक रोड परियोजना के दूसरे चरण के लिए तत्काल आधार पर पेड़ों की कटाई की अनुमति देने को कहा था।
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