बंगाल एसआईआर में आपत्तियों पर ट्रिब्यूनल गठित करें : शीर्ष कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के खिलाफ अपीलों पर सुनवाई के लिए अपीलीय न्यायाधिकरण गठित करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि न्यायिक अधिकारियों की निष्पक्षता पर सवाल उठाना न्यायपालिका का अपमान है। ममता बनर्जी ने धरना समाप्त किया।

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के खिलाफ लोगों की अपीलों पर सुनवाई को हाईकोर्ट के पूर्व जज की अगुवाई में अपीलीय न्यायाधिकरण गठित करने का निर्देश दिया। इससे पहले, शीर्ष अदालत ने कहा कि एसआईआर प्रक्रिया के तहत नाम हटाने और शामिल करने के दावों और आपत्तियों पर विचार करने के लिए तैनात न्यायिक अधिकारियों की निष्पक्षता पर सवाल उठाना न्यायपालिका का अपमान है। दूसरी ओर सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय के बाद रात में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ‘दोषपूर्ण मतदाता सूची संशोधन’ के खिलाफ अपना धरना पांचवें दिन समाप्त कर दिया।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और आर. महादेवन की पीठ ने सुनवाई के दौरान एसआईआर प्रक्रिया के तहत दावों, आपत्तियों के निपटारे के लिए तैनात न्यायिक अधिकारियों की भूमिका सवाल उठाने पर कड़ी नाराजगी जताई। पीठ ने याचिकाकर्ता से कहा कि आपने इस तरह की अर्जी दाखिल करने की हिम्मत कैसे की। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि न्यायिक अधिकारियों की निष्पक्षता पर सवाल उठाना, उनकी उनकी ईमानदारी को कमजोर करने का प्रयास है। मुख्य न्यायाधीश ने यह भी कहा कि इस अर्जी से पता चलता है कि आपको न्यायिक अधिकारियों पर भरोसा नहीं है। किसी को भी न्यायिक अधिकारियों से सवाल करने की हिम्मत नहीं करनी चाहिए। देश के मुख्य न्यायाधीश होने के नाते मैं इसे किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं करूंगा। पीठ ने यह नाराजगी उस अर्जी पर जाहिर की, जिसमें कहा गया कि न्यायिक अधिकारियों को मतदाता सूची से हटाए गए लोगों के दावों/आपत्तियों के निपटारे के लिए न्यायिक अधिकारियों की तैनाती को अनुमति नहीं दी जानी चाहिए थी।अपीलीय न्यायाधिकरण के लिए पूर्व जजों से आग्रह करेंसुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से हाईकोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस और दो या तीन पूर्व जजों, खासकर कलकत्ता हाईकोर्ट या पड़ोसी राज्यों से, अपीलीय न्यायाधिकरण में काम करने का अनुरोध करने को कहा है। पीठ ने कहा कि एक बार सिफारिश मिलने के बाद, निर्वाचन आयोग को ऐसी अपीलों की सुनवाई के लिए उन्हें अपीलीय न्यायाधिकरण के तौर पर अधिसूचित करना होगा। पीठ ने कहा कि न्यायाधिकरण में कितने सदस्य होंगे, यह हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश तय करेंगे।10.16 लाख दावों/ आपत्तियों का हुआ निपटाराकलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की ओर पेश रिपोर्ट पर विचार करने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्य में 9 मार्च की शाम तक मतदाता सूची से नाम हटाए जाने का सामना कर रहे लोगों के 10.16 लाख दावों और आपत्तियों का निपटारा कर दिया। शीर्ष अदालत ने इसके साथ ही पश्चिम बंगाल सरकार और निर्वाचन आयोग से एसआईआर के काम में लगे न्यायिक अधिकारियों को सभी तरह की लॉजिस्टिक सहयोग दें। इसके साथ ही, निर्वाचन आयोग को आदेश दिया कि हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की मंजूरी के बगैर ऐसी कोई शर्तें या आदेश जारी नहीं करें, जिससे इस प्रक्रिया में रुकावट आए।तकनीकी समस्या को दूर किया जाएसुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक अधिकारियों को एसआईआर के काम करने में आ रही तकनीकी दिक्कतों को दूर करने के लिए कहा है। पीठ ने न्यायिक अधिकारियों के लिए नए लॉगिन आईडी तुरंत बनाए जाएं ताकि वोटर लिस्ट में आसानी से बदलाव हो सके। पीठ ने कहा कि निर्वाचन आयोग का कोई भी अधिकारी अपील में न्यायिक अधिकारियों द्वारा दावा और आपत्तियों पर लिए गए फैसलों की समीक्षा नहीं कर सकता।700 न्यायिक अधिकारी कर रहे हैं एसआईआर में कामसुप्रीम कोर्ट में उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की ओर से पेश रिपोर्ट में कहा गया है कि एसआईआर के काम के लिए पश्चिम बंगाल से 500 और ओडिशा और झारखंड से लगभग 200 न्यायिक अधिकारियों को तैनात किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि न्यायिक अधिकारी चौबीसों घंटे काम कर रहे हैं।
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