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सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी 2017 के एक आदेश में संशोधन करते हुए भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के पूर्व अध्यक्ष अनुराग ठाकुर को गुरुवार को राहत दी। अदालत ने ठाकुर को बोर्ड के मामलों में उन पर लगा प्रतिबंध हटा दिया है। अब वह बोर्ड की गतिविधियों में भाग लेने के लिए स्वतंत्र हैं। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने 2017 के आदेश में संशोधन संबंधी ठाकुर की याचिका पर सुनवाई करते हुए आनुपातिकता का सिद्धांत लागू करते हुए गुरुवार को संबंधित आदेश में संशोधन किया। पीठ ने कहा कि हम इसे एक उपयुक्त मामला पाते हैं, ताकि यह साबित हो सके कि अदालत का आशय न तो आजीवन प्रतिबंध लगाने का था और न ही इस मामले के तथ्यों एवं परिस्थितियों में इतना कठोर प्रतिबंध लगाना उचित या जरूरी है।
प्यार से लेकर प्रमोशन तक 2026 का पूरा हाल जानें ✨अभी पढ़ेंशीर्ष अदालत ने संज्ञान लिया कि ठाकुर नौ साल से अधिक समय से बीसीसीआई के कामकाज से अलग रहे हैं। अदालत ने इस बात पर विचार किया कि ठाकुर ने तब उसके समक्ष बिना शर्त माफी मांगी थी। ठाकुर की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता पी.एस. पटवालिया ने कहा कि ठाकुर को बीसीसीआई के कामकाज से जुड़े रहने से रोकने का आदेश आजीवन नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि सब कुछ मुझ पर (ठाकुर पर) आ पड़ा, क्योंकि मैं बीसीसीआई का अध्यक्ष था। मैं बस इतना कह रहा हूं कि यह अब हमेशा के लिए नहीं चल सकता। शीर्ष अदालत ने दो जनवरी, 2017 को बीसीसीआई के तत्कालीन अध्यक्ष ठाकुर को निर्देश दिया था कि वह तुरंत बोर्ड के कामकाज से खुद को अलग कर लें और उससे किसी भी तरह का संबंध न रखें।
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