‘एआई कानूनी पेश के मूल कार्यों की जगह नहीं ले सकती’

Feb 28, 2026 08:17 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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सुप्रीम कोर्ट के जज के.वी. विश्वनाथन ने कहा कि एआई कानूनी पेशे के मूल कार्यों की जगह नहीं ले सकती। उन्होंने नागपुर में एक सभा को संबोधित करते हुए बताया कि वकीलों को प्रौद्योगिकी में नए कौशल विकसित करने की आवश्यकता है। न्यायमूर्ति ए.एस. चंदूरकर ने भी एआई की भूमिका पर चर्चा की और इसके साथ नई चुनौतियों का सामना करने की बात कही।

‘एआई कानूनी पेश के मूल कार्यों की जगह नहीं ले सकती’

सुप्रीम कोर्ट के जज के.वी. विश्वनाथन ने शनिवार को कहा कि एआई कानूनी पेशे के मूल कार्यों की जगह नहीं ले सकती और एक प्रशिक्षित कानूनी दिमाग हमेशा उस बढ़त को बनाए रखेगा जिसे किसी भी 'एल्गोरिदम' द्वारा दोहराया नहीं जा सकता। उन्होंने नागपुर में महाराष्ट्र राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के चौथे दीक्षांत समारोह में एक सभा को संबोधित किया, जहां भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश भूषण गवई विशिष्ट अतिथि थे। प्रौद्योगिकी का जिक्र करते हुए न्यायमूर्ति विश्वनाथन ने कहा कि 21वीं सदी में वकीलों से प्रौद्योगिकी में नए कौशल विकसित करने की अपेक्षा की जाती है। उन्होंने कहा कि समय बचाने वाली हर जिम्मेदारी को मापना और उसमें महारत हासिल करना जरूरी है, जिससे एक स्वाभाविक सवाल उठता है कि ‘कानूनी पेशे में एआई की क्या भूमिका है?’ न्यायमूर्ति विश्वनाथन ने कहा कि आप एआई के साथ साझेदारी कर सकते हैं, लेकिन आप एआई को उन मूल कार्यों को बदलने नहीं दे सकते जो आपको करने चाहिए।

इसी तरह की चिंताओं को दोहराते हुए, सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति ए.एस. चंदूरकर ने भी अपने भाषण के दौरान एआई की भूमिका पर चर्चा की। न्यायमूर्ति चंदूरकर ने टिप्पणी की कि प्रौद्योगिकी और एआई अब कानूनी पेशे सहित जीवन के हर क्षेत्र को प्रभावित कर रही हैं, और इन्होंने उल्लेखनीय दक्षता और नवाचार का परिचय दिया है। उन्होंने कहा कि हालांकि, इनसे नयी और जटिल चुनौतियां भी पेश होती हैं।

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