Hindi NewsNcr NewsDelhi NewsSupreme Court Issues Notice to Government and Banks in 22 93 Crore Digital Fraud Case Involving Elderly Victim
डिजिटल गिरफ्तारी: बुजुर्ग से बरीब 23 करोड़ की ठगी में केंद्र, सीबीआई, आरबीआई सहित 7 निजी बैंकों को नोटिस

डिजिटल गिरफ्तारी: बुजुर्ग से बरीब 23 करोड़ की ठगी में केंद्र, सीबीआई, आरबीआई सहित 7 निजी बैंकों को नोटिस

संक्षेप:

सुप्रीम कोर्ट ने 82 वर्षीय बुजुर्ग से 22.93 करोड़ रुपये की ठगी के मामले में केंद्र सरकार, सीबीआई और 7 बैंकों को नोटिस जारी किया है। याचिकाकर्ता ने बताया कि ठगों ने जाली आदेशों के माध्यम से उन्हें धोखा दिया और उनकी पूरी बचत स्थानांतरित करवा ली। बैंकों की लापरवाही पर भी सवाल उठाए गए हैं।

Jan 23, 2026 08:15 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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नई दिल्ली। विशेष संवाददाता सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को 82 साल के एक बुजुर्ग व्यक्ति से डिजिटल गिरफ्तारी करके 22.93 करोड़ रुपये की ठगी के मामले में केंद्र सरकार, सीबीआई, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) सहित 7 निजी बैंकों को नोटिस जारी किया है। शीर्ष अदालत ने ठगी के शिकार हुए बुजुर्ग ने शीर्ष अदालत को बताया कि गिरफ्तारी और संपत्ति जब्त होने के डर से उन्होंने अपनी जीवन भर की पूरी बचत विभिन्न बैंकों के खातों में स्थानांतरित कर दिया। माना जा रहा है कि डिजिटल गिरफ्तारी के जरिए यह अब तक के किसी एक व्यक्ति से सबसे बड़ी ठगी है।

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मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने इस मामले में याचिकाकर्ता द्वारा की गई कुछ मांगों को छोड़कर, अन्य पहलुओं पर केंद्र सरकार, सीबीआई, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) सहित 7 निजी बैंकों को नोटिस जारी कर जवरब मांगा है। इससे पहले, याचिकाकर्ता नरेश मल्होत्रा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता के. परमेश्वर ने पीठ से कहा कि उनके मुवक्किल के साथ ठगी की यह घटना तब हुई, जब उनके बच्चे विदेश में थे। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह घटना, मामले में शामिल बैंकों की बड़ी लापरवाही का नतीजा है और याचिकाकर्ता बैंकों के खिलाफ राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) जाने की पर विचार कर रहा है। वरिष्ठ अधिवक्ता परमेश्वर ने पीठ से कहा कि ‘बैंकों की भी कुछ जिम्मेदारी है, याचिकाकर्ता व्हीलचेयर पर आते हैं, उनकी उम्र लगभग 82 साल है। उन्होंने कहा कि इतने बड़ी रकम के लेनदेन का पता चलने पर बैंकों को भी अलर्ट रहना चाहिए। उन्होंने शीर्ष अदालत से से फ्रॉड करने वालों द्वारा इस्तेमाल किए गए म्यूल अकाउंट्स की पहचान करने के लिए आदेश जारी करने की मांग। इसके लिए आरबीआई को आदेश देकर कलेक्टिंग बैंकों को फ्रॉड लेनदेन में इस्तेमाल किए गए म्यूल खतों के खाताधारक/संचालक की पहचान करने और याचिकाकर्ता के खतों से ठगी की गई रकम का वापस सुनिश्चित करने का आदेश देने की मांग की। पीठ ने जिन मांगों पर नोटिस जारी किया, उन मांगों को लेकर याचिकाकर्ता को उपभोक्ता फोरम जाने की इजाजत दे दी। याचिका के मुताबिक याचिकाकर्ता जो एक वरिष्ठ नागरिक हैं और अकेले रहते हैं, को ठगों ने निशाना बनाया। याचिका में कहा गया है कि ठगों ने कानून प्रवर्तन एजेंसियों के अधिकारी बनकर व्हाट्सएप संदेशों और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कॉल के जरिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा कथित रूप से जारी किए गए जाली आदेशों को सहारा लेकर ठगी किया। याचिका में कहा गया है कि गिरफ्तारी और संपत्ति की जब्त करने की लगातार धमकी देकर और जाली न्यायिक दस्तावेजों का सहारा लेकर ठगों ने कई बैंक लेनदेन के माध्यम से याचिकाकर्ता को अपनी पूरी जीवन की बचत स्थानांतरित करने के लिए मजबूर किया गया। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल, डिजिटल गिरफ्तारी की जरिए बढ़ते ठगी पर लगाम लगाने के लिए इस तरह की घटनाओं की सीबीआई जांच के आदेश दिए हैं। इस तरह की घटना से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने भी एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है ताकि बचाव के उपायों और पीड़ितों को मुआवजे पर विचार किया जा सके। ‌