
राजनीतिक दलों के पंजीकरण संबंधी याचिका पर ईसीआई को नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने राजनीतिक दलों के पंजीकरण और विनियमन के लिए नियम बनाने की मांग को लेकर निर्वाचन आयोग को नोटिस जारी किया है। याचिका में फर्जी राजनीतिक दलों के पर्दाफाश और काले धन के दुरुपयोग का जिक्र...
धर्मनिरपेक्षता, पारदर्शिता को बढ़ावा देने के लिए राजनीतिक दलों के पंजीकरण और विनियमन के लिए नियम बनाने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को भारत के निर्वाचन आयोग (ईसीआई) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा। शीर्ष अदालत ने इस मांग को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर दिया है। जस्टिस सूर्यकांत और जॉयमाल्या बागची की पीठ ने निर्वाचन आयोग को नोटिस जारी करने के साथ ही, याचिकाकर्ता को भाजपा, कांग्रेस सहित निर्वाचन आयोग द्वारा मान्यता प्राप्त सभी राष्ट्रीय राजनीतिक दलों को पक्षकार बनाने का निर्देश दिया। पीठ ने कहा कि हम नोटिस जारी कर रहे हैं, लेकिन इससे एक समस्या उत्पन्न हो सकती है कि याचिका में राजनीतिक दलों को पक्ष नहीं बनाया गया है।
इसके साथ ही, राजनीतिक दलों को पक्षकार बनाने की मांग की। कई फर्जी राजनीतिक दलों का पर्दाफाश किया याचिका में जुलाई-अगस्त 2025 में आयकर विभाग द्वारा मारे गए छापों का जिक्र करते हुए कहा गया कि इससे यह पता चला कि इंडियन सोशल पार्टी, युवा भारत आत्मनिर्भर दल और राष्ट्रीय सर्व समाज पार्टी जैसे फर्जी राजनीतिक दलों का पर्दाफाश हुआ, जो हवाला लेनदेन के माध्यम से सैकड़ों करोड़ रुपये के काले धन को सफेद करते पाए गए। काले धन को सफेद करने का कार्य याचिका में कहा गया कि ये दल, कई अन्य दलों के साथ, कभी चुनाव नहीं लड़ते, बल्कि बेहिसाब धन को वैध बनाने, नकद में दान एकत्र करने और कमीशन काटने के बाद चेक के माध्यम से उसे वापस करने के लिए माध्यम के रूप में काम करते हैं। ऐसे दल लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में कहा गया कि ऐसे राजनीतिक दल अपराधियों और असामाजिक तत्वों को पदाधिकारी नियुक्त करके, व्यक्तिगत लाभ के लिए काले धन का दुरुपयोग और अनुचित पुलिस/सुरक्षा संरक्षण प्राप्त करके लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा पैदा करते हैं।

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