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‘कानून को इंसानी जिंदगी की हकीकतों के प्रति संवेदनशील रहना चाहिए’

‘कानून को इंसानी जिंदगी की हकीकतों के प्रति संवेदनशील रहना चाहिए’

संक्षेप:

सुप्रीम कोर्ट ने सड़क दुर्घटना में मारे गए व्यक्ति के परिजनों को मुआवजे की रकम बढ़ाते हुए कहा कि कानून को इंसानी जिंदगी की हकीकतों के प्रति संवेदनशील रहना चाहिए। न्यायालय ने मुआवजे की राशि 20.80 लाख रुपये कर दी, जबकि पहले यह 10.51 लाख रुपये थी।

Feb 06, 2026 09:00 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि कानून को इंसानी जिंदगी की हकीकतों के प्रति संवेदनशील रहना चाहिए, खासकर ऐसे मामलों में जिनमें पारिवारिक रिश्ते अचानक टूट जाते हैं। शीर्ष अदालत ने सड़क दुर्घटना में मारे गए एक व्यक्ति के परिजनों को मिलने वाले मुआवजे की रकम बढ़ाते हुए यह टिप्पणी की है। जस्टिस दीपांकर दत्ता और सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने अपने आदेश में कहा कि सड़क हादसे में जब किसी व्यक्ति की मौत होती है और उसके आश्रित मुआवजे के लिए आवेदन करते हैं, तो कोई भी रकम उस नुकसान की भरपाई नहीं कर सकती। मुआवजा सिर्फ एक मोटा अनुमान है, जो आश्रितों पर वित्तीय बोझ कम करने का एक सांकेतिक प्रयास है।

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उदाहरण के लिए, साथ की बात करें। किसी प्रियजन के साथ के नुकसान की कीमत लगाना असंभव है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पति-पत्नी, बच्चों या माता-पिता को दिया जाने वाला मुआवजा भावनात्मक खालीपन कम करने के बारे में है, लेकिन भुगतान कभी भी एक मोटे अनुमान से अधिक नहीं हो सकता। फैसले में कहा गया कि यह कुछ ऐसा है जैसे जिसे मापा नहीं जा सकता, उसे मापने की कोशिश करना। सुप्रीम कोर्ट ने अपने पूर्व के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि उक्त फैसले में शीर्ष अदालत ने ‘प्यार और स्नेह के नुकसान’ को मुआवजे के एक अलग मद के रूप में मान्यता दी थी, जो किसी प्रियजन की असामयिक मृत्यु पर परिवार के सदस्यों द्वारा झेली गई गैर-आर्थिक कमी को दर्शाता है। पीठ ने कहा कि हालांकि एक अन्य मामले में संविधान पीठ ने इस दृष्टिकोण को स्पष्ट रूप से अस्वीकार कर दिया था। पीठ ने कहा कि न्यायिक अनुशासन यह कहता है कि संविधान पीठ का फैसला कम संख्या वाली पीठ के फैसले पर हावी होना चाहिए। इसलिए, यह अदालत उसमें घोषित कानून का पालन करने के लिए बाध्य है। मुआवजे की रकम बढ़ाई पीठ ने कहा कि संविधान पीठ के फैसले में व्यक्त चिंता मुख्य रूप से निरंतरता और बिना सोचे-समझे विवेक से बचने की थी। हालांकि, शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि निरंतरता, हालांकि वांछनीय है, इसे उस बिंदु तक नहीं बढ़ाया जा सकता जहां यह उचित मुआवजा देने के मुख्य उद्देश्य को ग्रहण लगा दे। इसके साथ ही, सुप्रीम कोर्ट ने मौजूदा मामले में मुआवजे की रकम बढ़ाकर 20.80 लाख रुपये कर दिया। यह था मामला यह मामला, जून 2011 में एक सड़क दुर्घटना में 37 साल के एक व्यक्ति की मौत से जुड़ा है। इस मामले में चेन्नई के मोटर वाहन दुर्घटना दावा पंचाट ने मृतक के परिवार वालों को 9.37 लाख रुपये का मुआवजा दिया था। हालांकि हाईकोर्ट ने मुआवजे की रकम में मामूली बढ़ोतरी करते हुए 10.51 लाख रुपये कर दी थी।