
फीस बढ़ोतरी के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे निजी स्कूल
दिल्ली के निजी स्कूलों की फीस बढ़ोतरी का मुद्दा अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। स्कूलों ने हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश को चुनौती दी है, जिसमें दिल्ली सरकार के बनाए कानून पर रोक लगाने की मांग की गई है। अपील में कहा गया है कि यह कानून मनमाना और संवैधानिक प्रावधानों के खिलाफ है।
देश की राजधानी दिल्ली के निजी स्कूलों की फीस बढ़ोतरी का मुद्दा अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया। निजी स्कूलों ने हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश को शीर्ष अदालत में चुनौती दी है। हाईकोर्ट ने मनमानी फीस बढ़ोतरी पर लगाम लगाने के लिए दिल्ली सरकार द्वारा बनाए गए कानून और इसके तहत जारी अधिसूचना पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। निजी स्कूलों के संगठन ‘एक्शन कमेटी’ ने सुप्रीम कोर्ट में हाईकोर्ट के 8 जनवरी के अंतरिम आदेश के खिलाफ विशेष अनुमति याचिका दाखिल करते हुए फीस बढ़ोतरी को लेकर दिल्ली सरकार द्वारा बनाए गए कानून पर रोक लगाने की मांग की है।
अपील अधिवक्ता कमल गुप्ता के जरिए दाखिल की गई। अपील में दिल्ली स्कूल शिक्षा अधिनियम, 2025 के तहत बनाए नियम और निजी स्कूलों को फीस निर्धारण समिति गठित करने के आदेश पर रोक लगाने की मांग की। निजी स्कूलों ने शीर्ष अदालत से कहा कि जब तक हाईकोर्ट में फीस नियमन के मुद्दे से संबंधित याचिका लंबित है, तब तक इस कानून पर रोक लगाई जाए। अधिवक्ता गुप्ता ने कहा कि यदि इस कानून पर रोक नहीं लगाई गई तो स्कूलों को अपूर्णीय क्षति होगी। दिल्ली सरकार का कानून मनमाना अपील में कहा गया कि फीस नियमन के मुद्दे पर दिल्ली सरकार द्वारा बनाए गए कानून को मनमाना और संवैधानिक प्रावधानों के खिलाफ बताया। इसमें कहा गया कि दिल्ली विधानसभा को शिक्षा के मुद्दे पर कानून बनाने का कोई अधिकार नहीं है क्योंकि अनुच्छेद 239एए के तहत, दिल्ली विधानसभा को केवल राज्य सूची और समवर्ती सूची के विषयों पर ही कानूनी अधिकार है, और यह अधिकार स्पष्ट रूप से संसद की सर्वोच्च शक्तियों के अधीन है।

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