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ब्यूरो:: कोविड में जान गंवाने वाले निजी डॉक्टरों के परिवार भी बीमा लाभ के हकदार : सुप्रीम कोर्ट

ब्यूरो:: कोविड में जान गंवाने वाले निजी डॉक्टरों के परिवार भी बीमा लाभ के हकदार : सुप्रीम कोर्ट

संक्षेप:

- शीर्ष अदालत ने बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले को रद्द किया -

Dec 11, 2025 08:43 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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नई दिल्ली, विशेष संवाददाता। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि कोरोना महामारी के दौरान ड्यूटी करते हुए जान गंवाने वाले निजी अस्पतालों के डॉक्टरों के परिवार भी प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत 50 लाख रुपये के बीमा कवरेज के लाभ पाने के हकदार हैं। शीर्ष अदालत ने बॉम्बे हाई कोर्ट के उस फैसले को रद्द करते हुए यह आदेश दिया है, जिसमें कहा गया था कि निजी अस्पताल के डॉक्टर सरकार की बीमा योजना के तहत कवरेज का लाभ पाने के हकदार नहीं हैं। जस्टिस पी एस नरसिम्हा और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने कहा कि कोविड में डॉक्टरों की सेवाओं की जरूरत थी।

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कानूनों और विनियमों को लागू करने का मकसद डॉक्टरों की सेवाओं को लेने में कोई कसर नहीं छोड़ना था और बीमा योजना का भी यही मकसद था कि फ्रंटलाइन में काम करने वाले डॉक्टरों और स्वास्थ्य पेशेवरों को यह भरोसा दिलाया जा सके कि देश उनके साथ है। इस दौरान शीर्ष अदालत ने कहा कि पीएमजीकेवाई -पैकेज के तहत किए गए बीमा के लिए व्यक्तिगत दावों पर कानून के अनुसार और सबूतों के आधार पर विचार और फैसला किया जाएगा। यह है मामला : सुप्रीम कोर्ट ने प्रदीप अरोड़ा और अन्य की ओर से 9 मार्च, 2021 के बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर याचिका पर यह फैसला दिया। तब हाईकोर्ट ने कहा था कि निजी अस्पताल के कर्मचारी बीमा योजना के तहत लाभ पाने के हकदार नहीं हैं, जब तक कि उनकी सेवाओं की जरूरत राज्य या केंद्र सरकार द्वारा न ली गई हो। उच्च न्यायालय में किरण भास्कर सुरगाडे ने एक याचिका दायर की थी, जिन्होंने 2020 में कोरोना के कारण अपने पति को खो दिया था, जो महाराष्ट्र के ठाणे में एक प्राइवेट क्लिनिक चलाते थे। बीमा कंपनी ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण पैकेज के तहत उनके दावे को इस आधार पर खारिज कर दिया कि उनके पति के क्लिनिक को कोविड अस्पताल के रूप में मान्यता नहीं दी गई थी। इस बीमा योजना की घोषणा मार्च, 2020 में की गई थी और तब से इसका कवरेज बढ़ाया गया है। इसे हेल्थ वर्कर्स को सुरक्षा देने के लिए शुरू किया गया था ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोरोना की वजह से किसी भी मुश्किल की स्थिति में उनके परिवारों का ख्याल रखा जाए। इसके तहत स्वास्थ्य कर्मियों की मौत होने पर उनके परिजनों को 50 लाख रुपये मुआवजा देने का प्रावधान किया गया था। ‌