बिना ट्रायल के जेल में रखना सजा के बराबर : सुप्रीम कोर्ट

Newswrap हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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- पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया -

बिना ट्रायल के जेल में रखना सजा के बराबर : सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली, एजेंसी।यह देखते हुए कि बिना ट्रायल के जेल में रखना सजा के बराबर है। सुप्रीम कोर्ट ने हत्या की कोशिश के एक मामले में पंजाब के एक निवासी को जमानत दे दी। कोर्ट ने पाया कि आरोपी ने बिना ट्रायल शुरू हुए ही जेल में दो साल बिता दिए थे।जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस पीवी वराले की बेंच ने अपने हालिया आदेश में कहा कि प्रदीप कुमार उर्फ ​​बानू पर फरवरी, 2024 में हत्या की कोशिश सहित कई अपराधों के तहत केस दर्ज किया गया था, लेकिन अभियोजन पक्ष ने अभी तक इस मामले से जुड़े 23 गवाहों में से किसी की भी गवाही नहीं ली है।

कोर्ट ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के 11 जुलाई, 2025 के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें कुमार की ज़मानत याचिका खारिज कर दी गई थी। बेंच ने अपने 13 मार्च के आदेश में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी (अपीलकर्ता) पर लगे आरोपों को साबित करने के लिए 23 गवाहों की गवाही लेने का प्रस्ताव रखता है, लेकिन अभी तक किसी की भी गवाही नहीं हुई है। इसलिए ट्रायल पूरा होने में अभी कुछ समय लगने की संभावना है। कोर्ट ने आगे कहा कि कुमार की गिरफ्तारी को लगभग दो साल बीत चुके हैं, लेकिन ट्रायल अभी तक शुरू नहीं हुआ है और न ही इसके जल्द खत्म होने की कोई उम्मीद नजर आ रही है।कुमार पर कुछ शर्तें लगाते हुए बेंच ने कहा कि उसे जमानत पर रिहा किया जाएगा, बशर्ते वह ट्रायल कोर्ट की संतुष्टि के अनुसार जमानत बांड जमा करे और उन अन्य शर्तों का पालन करे, जो ट्रायल कोर्ट द्वारा लगाई जा सकती हैं। कोर्ट ने आगे कहा कि यदि ज़मानत देने की शर्तों और नियमों का किसी भी तरह से उल्लंघन होता है, तो ट्रायल कोर्ट को आरोपी की जमानत रद्द करने का पूरा अधिकार होगा।

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