‘समाधान योजना को मंजूरी देने में देरी दुर्भाग्यपूर्ण’
सुप्रीम कोर्ट ने एनसीएलटी द्वारा समाधान योजनाओं को मंजूरी देने में हो रही देरी पर चिंता व्यक्त की। अदालत ने एनसीएलटी और आईबीबीआई को लंबित आवेदनों की जानकारी देने का निर्देश दिया। लगभग दो साल से मंजूरी का इंतजार कर रही योजनाओं की स्थिति गंभीर बताई गई। जस्टिस पारदीवाला ने इस स्थिति को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) द्वारा समाधान योजनाओं को मंजूरी देने में हो रही अत्यधिक देरी पर गंभीर चिंता जताई। अदालत ने इसे बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण बताया। शीर्ष अदालत ने एनसीएलटी की प्रधान पीठ और भारतीय दिवाला और शोधन अक्षमता बोर्ड (आईबीबीआई) को समाधान योजनाओं के मंजूरी के लिए लंबित आवेदनों और देरी के कारणों पर विस्तृत आंकड़े पेश करने का निर्देश दिया। जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने एवीजे हाइट्स अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन बनाम आईआईएफएल फाइनेंस लिमिटेड और अन्य के मामले में यह आदेश दिया। पीठ ने एनसीएलटी को ये बताने को कहा कि समाधान योजना की मंजूरी के लिए कितने आवेदन लंबित हैं और किस वजह से मंजूरी देने संबंधी दाखिल अर्जियों पर अब तक फैसला नहीं हो पाया।
शीर्ष अदालत ने कहा कि जब समाधान योजनाएं मंजूरी के लिए आती हैं, तो एनसीएलटी की यह जिम्मेदारी है कि वह उसे समय पर मंजूर करे। सुप्रीम कोर्ट ने इस बात को बहुत गंभीरता से लेते हुण् सीओसी द्वारा मंजूर योजना पिछले लगभग दो सालों से एनसीएलटी की मंजूरी का इंतजार कर रही है। पीठ ने कहा कि यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि लगभग दो सालों से इस मंजूरी पर कोई निर्णय नहीं हुआ। जस्टिस पारदीवाला ने कहा कि हमारे संज्ञान में यह बात आई है कि एनसीएलटी की प्रधान पीठ, नई दिल्ली, और अन्य पीठों के पास भी, मंजूरी के लिए ऐसे कई आवेदन पिछले कई सालों से लंबित हैं।यह मामला आईआईएफएल के 85 करोड़ के दावे को 2020 में समाधान पेशेवर ने शुरू में खारिज कर दिया था। बाद में नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल ने इसे मंजूर कर लिया और 2023 में नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल ने भी इसे सही ठहराया। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में अपीलें दायर की गईं।
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