न्यायाधीश की टिप्पणियां पक्षपात का आधार नहीं हो सकतीं: सुप्रीम कोर्ट

न्यायाधीश की टिप्पणियां पक्षपात का आधार नहीं हो सकतीं: सुप्रीम कोर्ट

संक्षेप:

- दुष्कर्म मामले के दोषी प्रज्वल रेवन्ना की याचिका खारिज - निचली अदालत के मुकदमों

Dec 11, 2025 06:15 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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- निचली अदालत के जज पर पक्षपात के आरोप में ठोस आधार नहीं नई दिल्ली, एजेंसी। जनता दल सेक्युलर (जदएस) के पूर्व सांसद प्रज्वल रेवन्ना को सुप्रीम कोर्ट से गुरुवार को बड़ा झटका लगा। दुष्कर्म मामले में निचली कोर्ट में जारी सुनवाई को दूसरे अदालत में स्थानांतरित करने की अपील सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी। रेवन्ना ने जज पर पक्षपात का आरोप लगाया था, जिस पर सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि न्यायाधीश की टिप्पणियां पक्षपात का आधार नहीं हो सकतीं। बता दें, रेवन्ना के खिलाफ बेंगलुरु की विशेष सांसद/विधायक अदालत में सुनवाई हो रही है।

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पीठ ने कहा, हमारे पास इस बात पर संदेह करने का कोई कारण नहीं है कि न्यायाधीश इस तथ्य से प्रभावित नहीं होंगे कि याचिकाकर्ता को पहले मामले में दोषी पाया गया था और वे अपने निष्कर्ष मौजूदा मुकदमे में पेश किए गए सबूतों के आधार पर ही देंगे। कोर्ट ने साफ कर दिया कि निचली अदालत के जज पर पक्षपात के आरोप सिर्फ आरोप भर हैं, इनका कोई ठोस आधार नहीं दिखता। पीठ ने वकील पर जताई नाराजगी सुनवाई के दौरान रेवन्ना के वकील पर पीठ ने नाराजगी जताई। दरअसल, वकील ने कहा कि निचली अदालत के न्यायाधीश ने वकीलों के खिलाफ भी कुछ आपत्तिजनक टिप्पणियां की हैं, जिन्हें रिकॉर्ड से हटाना जरूरी है। इस पर जस्टिस बागची ने टिप्पणी करते हुए कहा, श्रीमान दवे, ये टिप्पणियां इसी विषय पर हाईकोर्ट के आदेश से प्रेरित हैं। आप न्यायिक अधिकारियों को ब्लैकमेल नहीं कर सकते। वकील अन्य मामलों में भी पेश होते हैं और बार-बार वकालतनामा वापस लेते हैं। इसके बाद सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि रेवन्ना के वकील हाईकोर्ट के समक्ष माफी मांग सकते हैं क्योंकि पीठासीन न्यायाधीश द्वारा की गई कुछ टिप्पणियों के आधार पर पक्षपात का आरोप लगाना अत्यंत अनैतिक है। हाईकोर्ट के आदेश में कोई हस्तक्षेप नहीं इस दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए कहा, हम यह संदेश नहीं देना चाहते कि रेवन्ना सुप्रीम कोर्ट गए और यह काम करवाया। हमें अपनी जिला न्यायपालिका के मनोबल का भी ध्यान रखना होगा। उन्होंने कहा, अदालत में काल्पनिक स्थितियां होती हैं। हम टिप्पणियां करते हैं। लेकिन न्यायाधीशों या अदालतों पर दबाव डालने को हल्के में नहीं लूंगा… जैसे ही न्यायाधीश कोई टिप्पणी करते हैं, उन पर आरोप लगने लगते हैं। पीठ ने हालांकि कहा कि न्यायाधीश व अदालतें भी गलतियां करती हैं, लेकिन उन्हें सुधारा जा रहा है। इस दौरान कहा कि हाईकोर्ट द्वारा की गई टिप्पणियों को रिकॉर्ड से हटाने के लिए उच्च न्यायालय से संपर्क किया जा सकता है। यह है मामला: गौरतलब है कि प्रज्जवल रेवन्ना को दुष्कर्म के एक अन्य मामले में सांसद/विधायक स्पेशल कोर्ट पहले ही दोषी ठहरा चुकी है और उन्हें उम्रकैद की सजा भी सुना चुकी है। इसी वजह से उन्होंने दावा किया था कि जिस जज ने उन्हें पहले उम्रकैद दी, वही जज अन्य मामलों की सुनवाई करते समय निष्पक्ष नहीं रह सकते। इस मामले में गत 24 सितंबर को हाईकोर्ट ने भी रेवन्ना की याचिका खारिज कर दी थी। इससे पहले बेंगलुरु की ट्रायल कोर्ट ने भी याचिका खारिज करते हुए कहा था कि यह विशेष एमपी/एमएलए अदालत है, जिसे विशेष रूप से जनप्रतिनिधियों के खिलाफ अपराधों की सुनवाई के लिए नामित किया गया था।