
नोएडा भूमि मुआवजे की जांच दो माह में पूरी हो : शीर्ष कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा में किसानों को मुआवजा देने में अनियमितता की जांच कर रही एसआईटी को आदेश दिया है कि वह मामले की जांच दो माह में पूरी करे। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि जिन किसानों को अधिक भुगतान किया गया, उन्हें सजा नहीं दी जाएगी। जांच का उद्देश्य केवल अधिकारियों की मिलीभगत को उजागर करना है।
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को नोएडा में जमीन अधिग्रहण के बदले किसानों को मुआवजा देने में हुई अनियमितता की जांच कर रही एसआईटी को निर्देश दिया कि मामले की जांच दो माह में हर हाल में पूरी करें, इससे ज्यादा समय नहीं दिया जा सकता। इसके अलावा अदालत ने एसआई से प्राधिकरण के 10-15 साल पहले प्राधिकरण में तैनात सीईओ, अधिकारियों और अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच करने का निर्देश दिया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति उज्जल भुयान और एन. कोटिस्वर सिंह की पीठ ने एसआईटी को मामले की जांच पूरी करने के लिए दो माह का अतिरिक्त समय देते हुए यह निर्देश दिया।

नोएडा प्राधिकरण की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ से कहा कि वह मामले में प्राधिकरण का रुख बताने के लिए हलफनामा दाखिल करना चाहते हैं। पीठ को बताया गया कि एसआईटी ने जांच को लेकर स्थिति रिपोर्ट दाखिल कर दी है और इसे पूरी करने के लिए अतिरिक्त समय की मांग की है। इस पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि एसआईटी ने जांच पूरी करने के लिए 3 माह का समय मांगा है, लेकिन हम सिर्फ 2 माह का वक्त दे रहे हैं क्योंकि पहले ही काफी समय दिया जा चुका है। किसानों को सजा नहीं दी जाएगी इसके साथ ही, मुख्य न्यायाधीश ने साफ किया कि जिन किसानों को अधिक भुगतान किया गया, उन्हें सजा नहीं दी जाएगी और उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि जांच के दौरान किसानों को परेशान नहीं किया जाना चाहिए। इससे पहले, किसान की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने पीठ को बताया कि किसानों को एसआईटी से अपना बयान दर्ज कराने के लिए नोटिस मिल रहे हैं। उन्होंने पीठ से कहा कि कृपया किसानों की रक्षा करें, क्योंकि यह उनकी गलती नहीं है। जांच सिर्फ अधिक मुआवजा देने वालों की होगी मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि हमने अपने पहले के आदेशों में ही साफ कर दिया कि जांच किसानों को परेशान करने के लिए नहीं है, बल्कि उन अधिकारियों की मिलीभगत की जांच करने के लिए है, जिन्होंने अधिक भुगतान किए हैं। भुगतान गलती से हुआ तो किसान सुरक्षा के हकदार मुख्य न्यायाधीश ने भरोसा दिलाया कि किसान को सुरक्षा दी जाएगी। हालांकि, उन्होंने आगे कहा कि हम जानना चाहेंगे कि यदि भुगतान गलती से हुआ है, तो आप कानून के हिसाब से सुरक्षा के हकदार हैं। उन्होंने साफ किया कि एसआईटी को सब कुछ जांचने और हमें रिपोर्ट देने की पूरी छूट होगी। एसआईटी जांच की सराहना सुप्रीम कोर्ट ने 13 अगस्त को मामले में नोएडा के अधिकारियों की भूमिका की जांच के लिए एसआईटी गठित करने का आदेश दिया था, जिन पर बिल्डरों के साथ मिलकर जमीन मालिकों को उनके हक से अधिक मुआवजा देने का आरोप है। पीठ ने कहा कि एसआईटी की 26 अक्तूबर की स्टेटस रिपोर्ट रिकॉर्ड में है। हम अब तक उठाए गए कदमों की तारीफ करते हैं। हमें उम्मीद है कि एसआईटी चल रही जांच को सही अंजाम तक ले जा पाएगी।

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