आम्रपाली : कब्जा प्रमाण पत्र देने में तेजी लाए प्राधिकरण

Jan 03, 2026 09:27 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को आम्रपाली समूह की फंसी हुई आवासीय परियोजनाओं के लिए कार्यपूर्ती और कब्जा प्रमाण पत्र जारी करने के लिए कदम उठाने का निर्देश दिया। कोर्ट ने यूपी सरकार से सभी आवश्यक दस्तावेज पेश करने के लिए कहा है ताकि हजारों घर खरीदारों को जल्द से जल्द घर मिल सके।

आम्रपाली : कब्जा प्रमाण पत्र देने में तेजी लाए प्राधिकरण

सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को आम्रपाली समूह के फंसे हुए आवासीय परियोजनाओं के लिए कार्यपूर्ती (सीसी) और कब्जा प्रमाण पत्र (ओसी) जारी करने में तेजी लाने के लिए समुचित कदम उठाने का निर्देश दिया। शीर्ष अदालत ने इसके लिए दोनों प्राधिकरणों के सक्षम अधिकारियों, कोर्ट द्वारा नियुक्त परियोजनाओं के रिसीवर व भारत सरकार के अटार्नी जनरल आर. वेंकटरमणी और एनबीसीसी के अधिकारियों को संयुक्त बैठक करने का निर्देश दिया। जस्टिस संजय कुमार और सतीश चंद्र शर्मा की पीठ के समक्ष कोर्ट द्वारा रिसीवर नियुक्त किए गए वेंकटरमणी ने एक संक्षिप्त नोट पेश करते हुए कहा कि इन परियोजनाओं के लिए पिछली मंजूरी व अनापत्ति से जुड़े प्रमाणपत्र के अभाव में ओसी और सीसी जारी होने में बाधा हो रही है।

उन्होंने नोएडा और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को ओसी और सीसी जारी करने का आदेश देने की मांग की। इसके बाद पीठ ने ओसी और सीसी जारी करने में आ रही बाधाएं दूर करने के लिए समुचित कदम उठाने को कहा है ताकि लोगों को उनका घर जल्द से जल्द मिल सके। इसके साथ ही, पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार को पूर्ववर्ती आम्रपाली ग्रुप को जारी सभी पिछले क्लीयरेंस और सर्टिफिकेट की कॉपी पेश करने का निर्देश दिया है क्योंकि इन दस्तावेजों के अभाव में नोएडा और ग्रेटर नोएडा में हजारों घर खरीदारों को निर्माण पूरा होने के बाद भी घर का कब्जा नहीं मिल पा रहा है। मामला लंबा खींचने के बजाय हल करें सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में आम्रपाली समूह की सभी फंसी हुई परियोजनाओं का निर्माण कार्य एनबीसीसी द्वारा कराया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में पारित आदेश में कहा है कि सभी संबंधित पक्षों को तकनीकी बातों पर मामले को और लंबा खींचने के बजाय इसे सुलझाने का प्रयास करना चाहिए। दस्तावेज पेश करे यूपी सरकार पीठ ने यूपी सरकार को अगली सुनवाई की तारीख पर उन दस्तावेजों को पेश करने का निर्देश दिया है जो मुख्य रूप से वैधानिक मंजूरी से संबंधित थे- जिसमें पर्यावरण मंजूरी, अग्नि सुरक्षा प्रमाण पत्र, लिफ्ट सुरक्षा क्लीयरेंस और विद्युत सुरक्षा अनुमति शामिल हैं, जो परियोजना शुरू होने से पहले आम्रपाली ग्रुप को जारी किए गए थे। समूह पर पिछला कोई उपकर बकाया था? सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार की ओर से पेश अधिवक्ता रूचिता गोयल को भी यह पता लगाने का आदेश दिया कि क्या मूल डेवलपर यानी आम्रपाली समूह पर कोई पिछला श्रम उपकर बकाया था। हजारों लोगों को मिलेगा घर सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश ग्रेटर नोएडा में पांच और नोएडा में सात परियोजनाओं में हजारों घर खरीदारों के लिए राहत बनकर आया है, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट के 2019 के ऐतिहासिक फैसले के बाद एनबीसीसी द्वारा पूरा किया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में आम्रपाली समूह की परियोजना का रेरा पंजीकरण रद्द कर दिया था, जब उसके निदेशकों पर घर खरीदारों द्वारा जमा फंड हड़पने का आरोप लगा था और रुकी हुई परियोजनाओं को पूरा करने का काम एनबीसीसी को सौंप दिया था। प्राधिकरण ने आम्रपाली से दस्तावेज मांगे थे मामले की सुनवाई के दौरान अटार्नी जनरल आर वेंकटरमणी ने पीठ से कहा कि प्राधिकरण भी राज्य संपत्ति विभाग से नो ड्यूज सर्टिफिकेट, अम्रपाली को दिए गए ओरिजिनल खरीदार के डिक्लेरेशन, लेबर सेस रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट, लेबर सेस पेमेंट चालान और दूसरे डॉक्यूमेंट्स की मांग कर रही थीं, जो अम्रपाली के पास थे। प्राधिकरण विभागों से पुष्टि कर सकते हैं उन्होंने बताया कि अथॉरिटी इन दस्तावेजों के जारी होने की पुष्टि संबंधित राज्य विभागों से खुद कर सकती हैं। उन्होंने कहा कि पानी के कनेक्शन के लिए जरूरी फीस और एक साल का अग्रिम शुल्क 24 मई, 2024 को जमा कर दिया गया था, बावजूद ओसी और सीसी की कमी के कारण कनेक्शन नहीं दिए गए। बकाया रकम के बिना भी पानी कनेक्शन दिए जा रहे दूसरी तरफ नोएडा और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने पीठ को बताया कि बकाया रकम की परवाह किए बगैर पानी के कनेक्शन दिए जा रहे हैं। हालांकि, प्राधिकरण ने कहा कि ओसी और सीसी के लिए बिल्डिंग बाय-लॉज में कानूनी क्लीयरेंस जमा करना जरूरी है और उसे (अथॉरिटी) भी इस मुद्दे पर छूट देने का कोई अधिकार नहीं है।

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