बंगाल : न्यायिक अधिकरियों की घेराबंदी की जांच एनआईए ही करेगी : शीर्ष कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में न्यायिक अधिकारियों पर हमले की घटना की जांच एनआईए को सौंप दी है। सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि राज्य पुलिस पर गंभीर आरोप हैं, जिसके चलते स्वतंत्र जांच आवश्यक है। एनआईए को सभी 12 प्राथमिकी की जांच करने और रिपोर्ट कोलकाता एनआईए कोर्ट में पेश करने का आदेश दिया गया है।

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में एसआईआर में लगे न्यायिक अधिकारियों की घेराबंदी और उन पर हमला किए जाने की घटना की जांच एनआईए ही करेगी। शीर्ष अदालत ने संविधान के अनुच्छेद-142 के तहत अपनी असाधारण शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए सभी मामलों की जांच एनआईए को सौंप दी। सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि ‘पश्चिम बंगाल के सरकारी तंत्र की साख गिर रही है और सचिवालय और सरकारी दफ्तरों में राजनीति घुस रही है। सीजेआई सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और विपुल एम. पंचोली की पीठ ने एनआईए को घटना को लेकर स्थानीय पुलिस द्वारा दर्ज की गई सभी 12 प्राथमिकी की जांच अपने हाथ में ले, भले ही वे प्राथामिकी किसी भी प्रावधान के तहत दर्ज हों।
दूसरे शब्दों में, चाहे एनआईए एक्ट के तहत आने वाले अपराध लागू होते हों या नहीं, लेकिन एनआईए ही इन मामलों की जांच करेगी। पीठ ने 1 अप्रैल को मालदा जिले कालियाचक 3 महिला सहित 7 न्यायिक अधिकारियों को आधी रात तक 9 घंटे से अधिक समय तक बंधक बनाए जाने की घटना पर स्वतः संज्ञान लिया था। इस मामले में पीठ ने भारत के निर्वाचन आयोग को निर्देश दिया था कि वह सीबीआई या एनआईए जैसी किसी स्वतंत्र एजेंसी से इन घटनाओं की शुरुआती जांच करवाए।राज्य पुलिस पर गंभीर आरोप : सीजेआईमामले की सुनवाई से दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि घटना की जांच को लेकर पेश की गई स्थिति रिपोर्ट देखने के बाद हम पाते हैं कि ‘राज्य पुलिस पर गंभीर आरोप हैं, ऐसे में किसी केंद्रीय एजेंसी द्वारा स्वतंत्र जांच जरूरी है।दायरा बढ़ने पर एनआईए भी दर्ज करेगी एफआईआरउन्होंने कहा कि ऐसे में अनुच्छेद-142 के तहत अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए, घटना को लेकर दर्ज सभी मामलों की जांच एनआईए को सौंपते हैं। पीठ ने साफ किया कि अगर जांच के दौरान यह पाया जाता है कि और भी अपराध हुए हैं, या अपराधों का दायरा अधिक बड़ा है, या इसमें और भी लोग शामिल हैं, तो एनआईए अतिरिक्त एफआईआर दर्ज कर सकती है।रिपोर्ट कोलकाता एनआईए कोर्ट में पेश की जाएसुप्रीम कोर्ट ने मामले में जांच रिपोर्ट कोलकाता स्थिति एनआईए कोर्ट में पेश करने को कहा है। साथ ही, समय-समय पर मामले की रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में भी पेश करने का आदेश दिया है। पीठ ने राज्य पुलिस को सभी मामलों की जांच एनआईए को सौंपने का आदेश दिया।कुल 12 एफआईआर दर्ज की गईंइससे पहले, एनआईए की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने पीठ को बताया कि तीन घटनाओं में सीधे तौर पर न्यायिक अधिकारी को परेशान किया गया। उन्होंने कहा कि एक घटना में, एक न्यायिक अधिकारी को कार्यक्रम स्थल तक पहुंचने से रोका गया, जबकि दूसरी घटना में कार्यक्रम स्थल पर न्यायिक अधिकारियों का घेराव किया गया। उन्होंने कहा कि न्यायिक अधिकारियों से जुड़ी घटनाओं के संबंध में सीधे तौर पर कुल तीन प्राथमिकी दर्ज की गई थीं, जबकि नौ अतिरिक्त प्राथमिकी दर्ज की गई जो आस-पास के इलाकों में रुकावटों से संबंधित थीं।गिरफ्तार लोगों से एनआईए पूछताछ कर सकती हैअतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने पीठ को बताया कि 24 आरोपियों की पहचान उपद्रवियों के रूप में की गई थी और इनमें से 5 का आपराधिक इतिहास रहा है। अब इन घटनाओं के संबंध में 432 लोगों की पहचान की गई है और कॉल डिटेल रिकॉर्ड की जांच चल रही है। पीठ ने कहा कि जिन 26 लोगों को मालदा घटना के सिलसिले में राज्य पुलिस द्वारा गिरफ्तार किया है, एनआईए उनसे पूछताछ कर सकती है, भले ही वे न्यायिक हिरासत में हों।मुख्य सचिव को फटकार, कोई कार्रवाई नहीं होगीसुप्रीम कोर्ट ने 1 अप्रैल को घटना वाले दिन, जब न्यायिक अधिकारियों का घेराव हुआ था, उस दिन कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश का फोन नहीं उठाने के लिए पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव दुष्यंत नारियाला को फटकार लगाई। पीठ ने मुख्य सचिव से कहा कि वे फोन न उठाने के लिए कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से माफी मांगे। मामले की सुनवाई में वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए मौजूद मुख्य सचिव ने खेद जताया। इसके बाद पीठ ने कहा कि मुख्य सचिव और अन्य अधिकारी ऑनलाइन मौजूद हैं। हमें उम्मीद है कि अधिकारियों को अब उस जिम्मेदारी का एहसास अच्छी तरह से हो गया होगा। हम उनके खिलाफ अब और कोई कार्रवाई करने का इरादा नहीं रखते हैं।दो सरगनाओं को गिरफ्तार कर चुकी है पुलिसइससे पहले, मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने पीठ से कहा कि दो मुख्य सरगनाओं मोफाकरुल इस्लाम और मौलाना मुहम्मद शाहजहां अली कादरी को स्थानीय पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है।पश्चिम बंगाल में चुनाव बाद भी तैनात रहेंगे केंद्रीय बल : सुप्रीम कोर्टसुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि पश्चिम बंगाल में हाल की घटनाओं को ध्यान में रखते हुए चुनाव बाद भी केंद्रीय बल तैनात रहेंगे। सीजेआई ने कहा कि अतीत में जिस तरह की घटनाएं हुई हैं, उसे देखते हुए पश्चिम बंगाल से केंद्रीय बलों को वापस नहीं बुलाया जाएगा। उन्होंने आगे कहा कि अगर राज्य की मशीनरी विफल होती है, तो हम देखेंगे कि क्या किया जा सकता है।
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