‘वकील न होने पर अदालत देगी कानूनी सहायता का प्रस्ताव’
सुप्रीम कोर्ट ने फौजदारी मामलों में वकील का खर्च न उठा पाने वाले आरोपियों के लिए कानूनी सहायता की पेशकश करने का निर्देश दिया। न्यायमूर्ति संजय कुमार और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने निचली अदालतों को इस आदेश का पालन करने की आवश्यकता बताई, जबकि एक आरोपी को जमानत दी गई।

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को अदालतों को निर्देश दिया कि वे फौजदारी मामलों में वकील का खर्च न उठा पाने वाले आरोपियों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए सुनवाई से पहले कानूनी सहायता की पेशकश करें और उनकी प्रतिक्रिया रिकॉर्ड पर दर्ज करें। न्यायमूर्ति संजय कुमार और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने स्वापक औषधि एवं मन:प्रभावी पदार्थ (एनडीपीएस) अधिनियम के तहत दर्ज एक मामले में रेजिनामरी चेल्लामणि की लंबी कैद को ध्यान में रखते हुए निचली अदालतों को अपने आदेश का कड़ाई से पालन करने का निर्देश दिया। पीठ ने चेल्लामणि को जमानत देते हुए कहा कि उन्होंने प्रारंभिक चरण में गवाहों से जिरह नहीं की थी और यह केवल तभी संभव हुआ जब उन्होंने अपने वकील को नियुक्त किया और गवाहों से दोबारा पूछताछ करने के लिए उनका आवेदन स्वीकार कर लिया गया।
शीर्ष अदालत ने निर्देश दिया कि फौजदारी मुकदमे से निपटने वाले निचली अदालतों का यह दायित्व है कि वे ऐसी परिस्थितियों का सामना करते हुए अभियुक्तों को वकील का खर्च वहन नहीं कर सकने की स्थिति में विधिक सहायता उपलब्ध कराने के बारे में सूचित करें।
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