बीसीडी चुनाव में वोटों की गिनती पर लगी रोक हटाने से इनकार
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली बार काउंसिल चुनाव में वोटों की गिनती पर रोक लगाने के आदेश में बदलाव करने से इनकार कर दिया। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि इसमें कई गंभीर मुद्दे हैं। हालांकि, अधिवक्ता ने गिनती जारी रखने की मांग की थी। पीठ ने मामले को दिल्ली हाईकोर्ट में ले जाने की सलाह दी।

नई दिल्ली, विशेष संवाददाता। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली बार काउंसिल (बीसीडी) चुनाव में वोटों की गिनती पर रोक लगाने के अपने आदेश में किसी तरह का बदलाव करने से इनकार कर दिया। शीर्ष अदालत ने उस मांग को ठुकरा दिया, जिसमें अंतिम नतीजे घोषित किए बगैर मतों की गिनती करने की अनुमति देने की मांग की गई थी। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ के समक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने मौखिक तौर पर सुप्रीम कोर्ट के 18 मई के आदेश में बदलाव करने और वोटों की गिनती करने की अनुमति मांगी थी। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने वोटों की गिनती करने की इजाजत देने से इनकार करते हुए कहा कि ‘हम इसकी इजाजत नहीं देंगे, इसमें कई गंभीर मुद्दे हैं। कृपया आप हाईकोर्ट के पास जाकर अपनी बात रखें। यह सिर्फ एक अंतरिम आदेश है, हम हाईकोर्ट के काम में कोई दखल नहीं देना चाहते। हमारे सामने अभी कोई मामला लंबित नहीं है। हम इस आदेश में कोई बदलाव नहीं करेंगे, इसके पीछे कई वजहें हैं।’
गिनती जारी रखने की मांग
वरिष्ठ अधिवक्ता सिंह ने पीठ से कहा था कि न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया समिति ने पहले ही गिनती जारी रखने की इजाजत दे दी थी। उन्होंने आगे कहा कि बीसीडी से इन चुनावों पर पहले ही पांच करोड़ रुपये खर्च कर दिए हैं। उन्होंने साफ किया कि वह सिर्फ गिनती जारी रखने की मांग कर रहे हैं, न कि परिणाम घोषित करने की। उन्होंने कहा कि गिनती की प्रक्रिया पूरी करने की अनुमति दी जाए और परिणाम की घोषणा को दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के अधीन कर दिए जाएं।
मतगणना पर रोक
उम्मीदवारों की ओर से पेश एक अन्य अधिवक्ता ने पीठ से कहा कि उनका पक्ष सुने बगैर ही मतगणना पर रोक लगाने का आदेश पारित किया गया है। उन्होंने कहा कि चुनावों के आयोजन को लेकर किसी ने कोई आपत्ति नहीं जताई थी। अधिवक्ता ने पीठ से कहा कि बीसीडी हर दिन पांच लाख रुपये खर्च कर रही है, और मतपत्र (बैलेट पेपर) खुले में पड़े हुए हैं। हालांकि, मुख्य न्यायाधीश ने मतों की गिनती की अनुमति देने से इनकार कर दिया और कहा कि ये सभी दलीलें दिल्ली हाईकोर्ट के सामने रखी जा सकती हैं। पीठ ने मामले में आदेश पारित करते हुए कहा कि मौखिक आग्रह को रिकॉर्ड पर ले लिया गया है। मामले की गंभीरता और तात्कालिकता को देखते हुए दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से यह अनुरोध किया जाता है कि वे इस मामले को एक खंडपीठ के समक्ष सूचीबद्ध करें और हो सके तो सोमवार को ही इसकी सुनवाई करें।
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