सुप्रीम कोर्ट ने एक ही वकील के 25 जनहित याचिकाओं पर विचार करने से किया इनकार

Apr 10, 2026 08:02 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को अधिवक्ता सचित गुप्ता द्वारा दायर 25 जनहित याचिकाओं पर विचार करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि पहले संबंधित प्राधिकरणों से संपर्क करना चाहिए। मुख्य न्यायाधीश ने गुप्ता को अपने पेशे पर ध्यान देने की सलाह दी और कहा कि उचित समय पर याचिकाओं पर विचार किया जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट ने एक ही वकील के 25 जनहित याचिकाओं पर विचार करने से किया इनकार

नई दिल्ली। विशेष संवाददाता सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को विभिन्न मुद्दों पर 25 अलग-अलग जनहित याचिकाएं दाखिल करने वाले अधिवक्ता से कहा कि उन्हें अदालत का रुख करने से पहले संबंधित प्राधिकरणों के पास जाना चाहिए। शीर्ष अदालत ने याचिका दाखिल करने वाले अधिवक्ता से कहा कि ‘आप अपने पेशे पर ध्यान दें, उचित समय आने पर आपकी याचिका पर विचार किया जाएगा।मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और विपुल एम पंचोली की पीठ ने अधिवक्ता सचित गुप्ता की सभी 25 जनहित याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया। इसके बाद यचिकाकर्ता ने याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी, जिसे पीठ ने स्वीकार कर लिया।

मुख्य न्यायाधीश ने गुप्ता से कहा कि ‘आप अपने पेशे पर ध्यान दें। आपको सीधे अदालत का दरवाजा खटखटाने के बजाय संबंधित प्राधिकरणों के पास जाना चाहिए और उन्हें विभिन्न मुद्दों पर जानकारी देनी चाहिए।’ पीठ ने कहा कि उचित समय आने पर यदि आवश्यकता हुई, तो न्यायालय उनकी याचिकाओं पर विचार भी करेगा। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि बार के सदस्य और कानून की जानकारी रखने वाले व्यक्ति होने के नाते याचिकाकर्ता को विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण अपनाते हुए मुद्दों की पहचान करनी चाहिए और संबंधित अधिकारियों को जागरूक बनाने का प्रयास करना चाहिए। पीठ ने कहा कि यदि कोई कार्रवाई नहीं होती है, तब याचिकाकर्ता अदालत का रुख कर सकता है। याचिकाकर्ता द्वारा दायर इन जनहित याचिकाओं में कई तरह के निर्देश देने का अनुरोध किया गया था, जिनमें देश में आधिकारिक कार्यों के लिए एक सामान्य संपर्क भाषा विकसित करने की नीति बनाने और आम जनता में कानूनी जागरूकता फैलाने के लिए टेलीविजन पर कानूनी कार्यक्रम शुरू करने की नीति तैयार करने की मांग शामिल थी। इन याचिकाओं में यह भी अनुरोध किया गया था कि साबुन में इस्तेमाल होने वाले रसायनों के उपयोग को लेकर दिशा-निर्देश तय किए जाएं, ताकि केवल वे रसायन इस्तेमाल हों जो हानिकारक बैक्टीरिया को खत्म करें, न कि त्वचा के लिए जरूरी बैक्टीरिया को। साथ ही, अन्य जनहित याचिका में भिखारियों, ट्रांसजेंडर जैसे वंचित वर्गों के उत्थान के लिए नीति बनाने के निर्देश देने का अनुरोध किया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने 9 मार्च को भी अधिवक्ता गुप्ता द्वारा दायर पांच जनहित याचिका को आधारहीन बताते हुए खारिज कर दिया था। इनमें एक याचिका ऐसी भी थी, जिसमें यह जानने के लिए वैज्ञानिक अध्ययन कराने की मांग की गई थी कि क्या प्याज और लहसुन में तामसिक (नकारात्मक) ऊर्जा होती है।

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