‘दुष्कर्म मामले की जांच में पुलिस ने दिखाई हिचकिचाहट’
दिल्ली से सटे गाजियाबाद में 4 साल की बच्ची से दुष्कर्म के बाद हत्या के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस की हिचकिचाहट पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने आरोपपत्र की समीक्षा का निर्देश दिया और कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया जाएगा। मामले की सुनवाई अगले सप्ताह होगी।

देश की राजधानी दिल्ली से सटे गाजियाबाद में 4 साल की बच्ची से दुष्कर्म के बाद हत्या के मामले में नाराजगी जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि उत्तर प्रदेश पुलिस ने ‘मुकदमा दर्ज करने से लेकर पूरी जांच में हिचकिचाहट दिखाई।’ शीर्ष अदालत ने मृतक बच्ची के पिता की ओर से पेश अधिवक्ता से पुलिस द्वारा दाखिल आरोपपत्र का अध्य्यन करने और अगर इसमें कोई कमियां है तो यह बताने को कहा है ताकि यदि जरूरत हो तो जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित की जा सके। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने यह निर्देश तब दिया, जब उत्तर प्रदेश पुलिस की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि मामले में 3 अप्रैल को पॉक्सो की धाराओं के तहत अदालत में एक पूरक आरोपपत्र दाखिल की गई है और संबंधित अदालत ने उस पर संज्ञान ले लिया है।
इसके बाद पीठ ने पुलिस को पीड़ित बच्ची के परिवार को आरोपपत्र की प्रति मुहैया कराने का निर्देश दिया। पीठ ने बच्ची के पिता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता एन. हरिहरन से आरोपपत्र का अध्य्यन करने को कहा। साथ ही कहा कि एसआईटी बनाने की हमारी अधिक जल्दबाजी में, हमें इस प्रक्रिया में देरी नहीं करनी चाहिए। पीठ ने कहा कि आरोपपत्र की समीक्षा के बाद आप (याचिकाकर्ता के वकील) बता सकते हैं कि क्या कोई कमी रह गई है और क्या एसआईटी की जरूरत है। पीठ ने कहा कि हम मामले को बंद नहीं कर रहे हैं, और जरूरत पड़ी तो एसआईटी का गठन करेंगे। अब मामले की सुनवाई अगले सप्ताह होगी।दो अस्पतालों को जवाब देने का निर्देशसुप्रीम कोर्ट ने दो निजी अस्पतालों खजान सिंह मानवी हेल्थ केयर और सेंट जोसेफ (मरियम) हॉस्पिटल को भी अपना समुचित जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। दोनों अस्पतालों पर आरोप है कि उन्होंने पीड़ित बच्ची का इलाज करने से मना कर दिया था, जिसे बाद में एक सरकारी अस्पताल में मृत घोषित कर दिया गया था। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि पुलिस मुकदमा दर्ज करने और जांच में हिचकिचाहट दिखाई, यहां तक कि हर चीज में हिचकिचाहट दिखाई।एसआईटी या सीबीआई से जांच कराने की मांगसुप्रीम कोर्ट पीड़ित बच्ची के पिता (जो एक दिहाड़ी मजदूर हैं) द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही है। याचिका में मामले की जांच कोर्ट की निगरानी में किसी एसआईटी या सीबीआई से कराने की मांग की है। पीड़ित बच्ची के पिता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हरिहरन ने कहा कि अस्पतालों को बचाने की कोशिश की गई थी। उन्होंने कहा कि नाबालिग बच्ची की मौत इसलिए हुई क्योंकि सही समय पर उसका इलाज नहीं किया गया।घटना के एक दिन बाद भी प्राथमिकी दर्ज नहीं की गईयह घटना 16 मार्च को हुई थी, लेकिन 17 मार्च की सुबह 3.30 बजे तक कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई थी और मुकदमा दर्ज किया भी तो दुष्कर्म की धाराओं को नहीं लगाया। इस मामले में 10 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने गाजियाबाद पुलिस के संवेदनहीन रवैये की कड़ी आलोचना की। पीठ ने इस मामले में गाजियाबाद के पुलिस आयुक्त, जांच अधिकारी को कोर्ट में सभी दस्तावेजों के साथ पेश होने का निर्देश दिया था।
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