राज्यों में कार्यवाहक पुलिस प्रमुख के चलन पर रोक लगनी चाहिए- सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कार्यवाहक पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) की नियुक्ति में देरी पर कड़ी नाराजगी जाहिर की। शीर्ष अदालत ने राज्यों को संघ लोकसेवा आयोग (यूपीएससी) को समय पर प्रस्ताव भेजने का निर्देश दिया। यदि राज्यों ने समय पर प्रस्ताव नहीं भेजा, तो यूपीएससी अवमानना की कार्रवाई कर सकता है।

नई दिल्ली। विशेष संवाददाता सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कुछ राज्यों में कार्यवाहक पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) के चलन पर कड़ी नाराजगी जाहिर की और कहा कि इस प्रथा पर रोक लगनी चाहिए। शीर्ष अदालत ने कई राज्य सरकारों द्वारा डीजीपी की नियुक्ति के लिए संघ लोकसेवा आयोग (यूपीएससी) को प्रस्ताव भेजने में देरी पर संज्ञान लेते हुए यह टिप्पणी की है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने इसे गंभीरता से लेते हुए कहा कि राज्यों को डीजीपी की नियुक्ति के लिए यूपीएससी को प्रस्ताव भेजने में देरी नहीं करनी चाहिए। इसके साथ ही, शीर्ष अदालत ने यूपीएससी को डीजीपी की नियुक्ति के लिए प्रस्ताव भेजने के लिए राज्यों को रिमाइंडर भेजने का अधिकार दिया।
पीठ ने साफ कहा है कि यदि रिमाइंडर भेजने के बाद भी कोई राज्य प्रस्ताव नहीं भेजता है तो यूपीएससी ऐसे राज्यों के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू करने के लिए स्वतंत्र होगा। पीठ ने प्रकाश सिंह मामले में शीर्ष अदालत के दिशा-निर्देशों के अनुसार डीजीपी की नियुक्ति के लिए प्रस्ताव भेजने में कई राज्यों की ओर से अत्यधिक देरी के संबंध में संघ लोक सेवा आयोग द्वारा व्यक्त की गई चिंता का पूरी तरह से समर्थन किया। पुलिस सुधारों से संबंधित प्रकाश सिंह मामले में, शीर्ष अदालत ने दिशा-निर्देश जारी किए थे, जिसमें यूपीएससी द्वारा पैनल में शामिल तीन सबसे वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों में से डीजीपी के चयन को अनिवार्य किया गया था और उनके लिए दो साल का निश्चित कार्यकाल निर्धारित किया गया था। इससे पहले, यूपीएससी की ओर से पेश अधिवक्ता ने पीठ से कहा कि राज्य सरकारों द्वारा प्रस्ताव भेजने में देरी से योग्य और वरिष्ठ अधिकारियों को डीजीपी के रूप में नियुक्ति के लिए विचार किए जाने से वंचित किया जाता है। आयोग ने कहा कि कई राज्य शीर्ष अदालत के निर्देशों की पूरी तरह से अवहेलना करते हुए डीजीपी की नियुक्ति के लिए प्रस्ताव भेजने में देरी करते रहते हैं और नियमित नियुक्ति के बजाय कार्यवाहक डीजीपी की नियुक्ति करके एक तदर्थ व्यवस्था को प्राथमिकता दी जा रही थी। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जाहिर करते हुए ‘प्रकाश सिंह मामले में जारी दिशा-निर्देशों का कोई उल्लंघन न हो, यह सुनिश्चित करने के लिए हम यूपीएससी को सबसे पहले राज्य सरकारों को डीजीपी की नियुक्ति के लिए समय पर प्रस्ताव भेजने के लिए ध्यान दिलाने के लिए अधिकृत करते हैं। साथ ही कहा कि यदि ध्यान दिलाए जाने के बाद भी यदि राज्यों द्वारा समय पर प्रस्ताव पेश नहीं किया जाता है तो यूपीएससी प्रकाश सिंह मामले में उसके समक्ष एक आवेदन दायर करे। सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना उच्च न्यायालय के 9 जनवरी के फैसले के खिलाफ यूपीएससी की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। अब शीर्ष अदालत ने यूपीएससी को तेलंगाना के लिए पुलिस महानिदेशक की नियुक्ति के लिए एक बैठक बुलाने और सिफारिश करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया। तेलंगाना में 2017 से कार्यवाहक पुलिस महानिदेशक कार्यरत हैं।

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