चीन से आए सीसीटीवी कैमरे हटाने के लिए औपचारिक आदेश नहीं- केंद्र
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में स्पष्ट किया कि देशभर में लगाए गए चीनी कंपनियों के सीसीटीवी कैमरों को हटाने के लिए कोई औपचारिक आदेश नहीं दिया गया है। जस्टिस मेहता ने मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए पूछा, जबकि गृह सचिव को अदालत में उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया है ताकि पुलिस थानों में सीसीटीवी योजना के क्रियान्वयन में सहायता मिल सके।

नई दिल्ली। विशेष संवाददाता केंद्र सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में साफ किया कि देशभर में लगाए गए चीनी कंपनियों द्वारा निर्मित सीसीटीवी कैमरों को हटाने के लिए कोई औपचारिक आदेश जारी नहीं किया है। केंद्र सरकार ने यह जानकारी तब दी, जब सुप्रीम कोर्ट ने मीडिया में प्रकाशित खबरों का हवाला देकर सरकार द्वारा सीसीटीवी कैमरों को हटाने के बारे में सवाल किया।जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की पीठ ने देशभर के थानों में सीसीटीवी लगाए जाने से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान सरकार से इस बारे में जानना चाहा। जस्टिस मेहता ने ‘हाल ही में प्रकाशित उन मीडिया रिपोर्ट का हवाला दिया, जिनमें बताया गया था कि पाकिस्तान से जुड़ा एक जासूसी नेटवर्क भारत में डेटा इकट्ठा करने के लिए सीसीटीवी कैमरों का इस्तेमाल कर रहा है।
उन्होंने कहा कि ‘भारत सरकार ने खुद निर्देश दिए हैं कि पड़ोसी देश चीन द्वारा लगाए गए सभी कैमरे हटा दिए जाएं क्योंकि वे डेटा इकट्ठा करके उसे वहां भेज रहे हैं।’ जस्टिस मेहता ने कहा कि ‘मैंने अभी-अभी एक खबर पढ़ी, जिसमें सरकार उन सभी कैमरों को हटाने के बारे में सोच रही है, तो फिर राज्यों को ये कैमरे लगाने के लिए बजट कहां से मिलेगा? उन्होंने निगरानी के बुनियादी ढांचे को बदलने के व्यापक वित्तीय और लॉजिस्टिकल प्रभाव के बारे में भी चिंता जताई और कहा कि जब सुरक्षा का मामला होता है, क्योंकि ये कैमरे सिर्फ पुलिस थानों तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि ये दूसरी रणनीतिक जगहों पर भी लगे हैं, तो एक बार जब आप इन्हें बदलने की प्रक्रिया शुरू करेंगे, तो आपको सभी कैमरों को बदलना होगा और आपको इतनी बड़ी संख्या में कैमरे कहां से मिलेंगे?’ जस्टिस मेहता के इन सवालों का जवाब देते हुए, केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल राजकुमार बी. ठाकरे ने कहा कि इस मामले पर केंद्र सरकार की ओर से अभी तक कोई औपचारिक निर्देश जारी नहीं किए गए हैं।सुप्रीम कोर्ट ने गृह सचिव को कोर्ट में मौजूद रहने का दिया निर्देशसुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय गृह सचिव को मंगलवार को अदालत में मामले की सुनवाई के दौरान मौजूद उपस्थित रहने के लिए कहा है ताकि देशभर में पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने की योजना के क्रियान्वयन में उनसे उचित सहायता प्राप्त की जा सके। जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की पीठ ने यह आदेश पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरों की कार्यक्षमता में कमी से संबंधित एक स्वतः संज्ञान मामले की सुनवाई करते हुए दिया है। पीठ ने यह आदेश तब दिया जब मामले में न्याय मित्र की भूमिका निभा रहे वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने पीठ को बताया कि अधिकांश राज्यों ने थानों में सीसीटीवी लगा लिए हैं और वे अब सेंट्रलाइज्ड डैशबोर्ड बनाने की प्रक्रिया में हैं। उन्होंने पीठ से कहा कि ‘केरल का सिस्टम सबसे अच्छा है, तो जस्टिस नाथ ने सवाल किया कि यदि आप कहते हैं कि केरल का सिस्टम सबसे अच्छा है, तो दूसरे राज्य भी उसे क्यों नहीं अपना सकते?’ पीठ ने कहा कि अधिकारियों को इस पर चर्चा करनी चाहिए। दूसरी तरफ केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ठाकरे ने पीठ से कहा कि इस योजना के लिए 60 फीसदी धन केंद्र सरकार मुहैया कराती है। पीठ को यह भी बताया कि अवर सचिव स्तर के अधिकारी ने उस बैठक में हिस्सा लिया था, जो सुप्रीम कोर्ट द्वारा पहले जारी किए गए आदेशों में उठाए गए मुद्दों की व्यावहारिकता, तौर-तरीकों और उन्हें लागू करने के ढांचे पर चर्चा करने के लिए बुलाई गई थी। इस पर पीठ ने अपनी नाराजगी जाहिर की और केंद्र से कहा कि ‘हम तो आदेश जारी कर रहे हैं और आप बैठक में हिस्सा लेने के लिए एक अवर सचिव स्तर के अधिकारी भेज रहे हैं? इसके बाद केंद्र सरकार ने पीठ को भरोसा दिलाया कि आगामी बैठक में उच्च अधिकारी शामिल होंगे। इसके बाद पीठ ने मामले की सुनवाई मंगलवार तक के लिए स्थगित करते हुए केंद्रीय गृह सचिव को अदालत में मौजूद रहने का निर्देश दिया।
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