
असम में भी बिहार जैसा एसआईआर कराने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल
सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है जिसमें निर्वाचन आयोग के असम में विशेष पुनरीक्षण के निर्णय को चुनौती दी गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि आयोग ने अन्य राज्यों के मुकाबले असम के लिए भेदभावपूर्ण आदेश दिया है। याचिका में असम में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की मांग की गई है।
नई दिल्ली। विशेष संवाददाता सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में भारत के निर्वाचन आयोग (ईसीआई) के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें बिहार और यूपी, मध्य प्रदेश, सहित 12 दूसरे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में किए गए मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बजाए असम में ‘विशेष पुनरीक्षण’ करने का फैसला किया है। शीर्ष अदालत में दाखिल याचिका में मतदाता सूची के शुद्धीकरण के नाम पर राज्यों के बीच भेदभाव करने का आरोप लगाया है। शीर्ष अदालत से असम में भी बिहार जैसा एसआईआर कराने की मांग की है। गुवाहाटी उच्च न्यायालय के बार एसोसिएशन के पूर्व प्रेसिडेंट अध्यक्ष मृणाल कुमार चौधरी की ओर से दाखिल याचिका में निर्वाचन आयोग द्वारा 17 नवंबर को असम में मतदाता सूची के पुनरीक्षण के लिए जारी आदेश को मनमाना, भेदभावपूर्ण और अनुचित बताते हुए रद्द करने की मांग की है।

याचिका में कहा गया है कि निर्वाचन आयोग ने उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, केरल, मध्य प्रदेश, राजस्थान, तमिलनाडु, अंडमान और निकोबार आइलैंड्स, लक्षद्वीप और पुडुचेरी में विशेष गहन पुनरीक्षण की तुलना में असम के लिए कम लेवल का मतदाता सूची का पुनरीक्षण का आदेश दिया है जो कि राज्यों के बीच भेदभावपूर्ण है। याचिका में आरोप लगाया है कि निर्वाचन आयोग का यह कदम उसके अपने ही रुख के विपरीत है जो उसने बिहार एसआईआर आदेश और शीर्ष अदालत में दाखिल किए गए हलफनामा में अपनाया था। याचिका में कहा है कि आयोग ने शीर्ष अदालत में हलफनामा दाखिल कर कहा था कि पूरे देश में एसआईआर कराया जाएगा, लेकिन अब आयोग ने असम के लिए एसआईआर के लिए सिर्फ विशेष पुनरीक्षण का आदेश दिया है। याचिका में असम के पूर्व राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल एसके सिन्हा की रिपोर्ट और उस समय के गृह मंत्री इंद्रजीत गुप्ता के बयानों का भी जिक्र किया है, जिसमें कहा गया था कि 1997 तक असम में 40 से 50 लाख अवैध प्रवासी रह रहे हैं। याचिका में कहा गया है कि लाखों अवैध प्रवासी अभी असम में रह रहे हैं और उनके नाम मौजूदा मतदाता सूची मेय शामिल हैं। याचिका में कहा गया है कि जब तक असम में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण नहीं किया जाता, ये लोग आने वाले विधानसभा चुनाव में मताधिकार प्राप्त कर लेंगे और इसकी वजह से राज्य का सामाजिक और राजनीतिक ताने-बाने पर बुरा असर पड़ेगा। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल इस याचिका में, आयोग ने 17 नवंबर के आदेश को रद्द करने और असम में भी बिहार और अन्य राज्यों में हो रहे विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया अपनाने का आदेश देने की मांग की।

लेखक के बारे में
Hindustanलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।




